Rocklink की एडवांस्ड रिसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी
सिकंदराबाद, उत्तर प्रदेश में स्थित यह प्लांट Rocklink की खास R2 रिसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है। इस एडवांस्ड प्रोसेस से एल्यूमीनियम, कॉपर और आयरन जैसे मेटल्स का 98% से ज्यादा हिस्सा रिकवर किया जाता है, जिससे हाई-प्यूरिटी "ब्लैक मास" बनता है। यह ब्लैक मास लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे कीमती कंपोनेंट्स निकालने के लिए जरूरी है, जो बैटरी के मुख्य हिस्से हैं और जिनकी भारत में सोर्सिंग मुश्किल है।
परमानेंट मैग्नेट्स और अन्य की रीसाइक्लिंग
यह फैसिलिटी परमानेंट मैग्नेट्स जैसे NdFeB, SmCo, और AlNiCo अलॉयज को भी रिसाइकल करेगी। ये मैग्नेट्स EV मोटर्स और इंडस्ट्रियल मशीनरी के लिए बेहद अहम हैं। Rocklink इंडिया में मैग्नेट स्क्रैप की आसान कलेक्शन के लिए अपना यूरोपियन 'Magcycle' रिवर्स लॉजिस्टिक्स मॉडल भी ला रहा है।
भारत के बढ़ते बैटरी ई-वेस्ट का समाधान
भारत में 2030 तक सालाना 100,000 टन से ज्यादा लिथियम-आयन बैटरी ई-वेस्ट (waste) पैदा होने का अनुमान है। ऐसे में Rocklink का यह प्लांट बहुत बड़ा रोल निभाएगा। कंपनी बैटरियों की लाइफ बढ़ाने और नए रॉ मैटेरियल्स की जरूरत कम करने के लिए बैटरी रिफर्बिशमेंट (refurbishment) को भी इंटीग्रेट करने की योजना बना रही है। आगे चलकर, 2026 की पहली तिमाही (Q1 2026) तक एक अलग 1,500 TPA रेयर अर्थ क्लोराइड प्रोसेसिंग लाइन भी शुरू होगी, जो डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग को संभालेगी।
