मुनाफे में रॉकेट सी उड़ान!
Rishabh Instruments के शेयर ने नतीजे आने के बाद से ही रॉकेट की तरह उड़ान भरी है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के कंसोलिडेटेड नतीजे पेश किए हैं, जिसमें नेट प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले 292% बढ़कर ₹82.26 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, Q4 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 19.5% बढ़कर ₹204.86 करोड़ रहा, और पूरे साल का रेवेन्यू ₹775.15 करोड़ दर्ज किया गया। सबसे खास बात यह है कि Q4 में नेट प्रॉफिट 227.8% की छलांग लगाकर ₹20.03 करोड़ पर जा पहुंचा। कंपनी ने निवेशकों को ₹2 प्रति इक्विटी शेयर का डिविडेंड (Dividend) देने का भी ऐलान किया है। नतीजे जारी होने के बाद शेयर में तेजी आई, हालांकि यह अपने 52-हफ्ते के हाई ₹549 के स्तर से थोड़ा नीचे ₹465-₹480 के बीच ट्रेड कर रहा है।
सेक्टर में बूम और अधिग्रहण का फायदा
यह शानदार परफॉर्मेंस भारत के इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर में चल रहे बूम के बीच आई है, जिसके 2030 तक 15.9% की CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ने का अनुमान है। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरीकरण और रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) पर फोकस से इस सेक्टर को जबरदस्त बढ़ावा मिल रहा है। Rishabh Instruments ने अपनी सब्सिडियरी Lumel S.A. के जरिए MICROSYS spol. s.r.o. के अधिग्रहण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिससे कंपनी की इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और SCADA सिस्टम की क्षमताएं और मजबूत हुई हैं।
वैल्यूएशन को लेकर चिंताएं
हालांकि, शेयर की वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर कुछ सवाल जरूर उठ रहे हैं। कंपनी का P/E रेशियो (Price-to-Earnings Ratio) करीब 27x है, जो कि इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के औसत 34x से कम है। लेकिन, यह GPT Infraproject (P/E 16.47x) और Salzer Electronics (P/E 23.86x) जैसे साथियों से ऊपर है। इससे पता चलता है कि निवेशक पहले से ही शेयर में काफी उम्मीदें लगाए हुए हैं। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalization) लगभग ₹1,796 करोड़ है।
मार्जिन की अस्थिरता और बिजनेस का दबाव
दूसरी ओर, कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव देखा गया है। FY24 में यह 14.30% से घटकर 11.2% पर आ गया था, और FY25 की पहली छमाही में यह और गिरकर 6.1% रह गया। इसका एक बड़ा कारण एल्युमीनियम डाई कास्टिंग बिजनेस है, जिसने ऑपरेटिंग लॉस दर्ज किया है और आगे भी इसे चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी 3.7% से 8.25% के बीच रहा है, जो शेयरहोल्डर फंड्स पर रिटर्न की दक्षता पर सवाल उठाता है। प्रमोटर्स की 69.55% हिस्सेदारी है, और इसमें कोई भी बड़ी गिरावट बाजार को चिंतित कर सकती है।
एनालिस्ट्स का भरोसा
इन चिंताओं के बावजूद, ज्यादातर एनालिस्ट (Analysts) Rishabh Instruments को लेकर पॉजिटिव हैं। एक प्रमुख एनालिस्ट ने इसे 'Strong Buy' रेटिंग दी है और 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹520 तय किया है, जो मौजूदा स्तर से 8.58% की तेजी का संकेत देता है। कंपनी को MSKA & Associates LLP से ऑडिट रिपोर्ट में कोई बड़ी आपत्ति नहीं मिली है।