Reliance Infra Shares: ED ने ₹1,575 करोड़ की Subsidiaries की हिस्सेदारी अटैच की, स्टॉक में आई बड़ी गिरावट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Reliance Infra Shares: ED ने ₹1,575 करोड़ की Subsidiaries की हिस्सेदारी अटैच की, स्टॉक में आई बड़ी गिरावट
Overview

Reliance Infrastructure Limited (R-Infra) को आज एक बड़ा झटका लगा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कंपनी की तीन प्रमुख Subsidiaries – BSES Yamuna Power Limited, BSES Rajdhani Power Limited, और Mumbai Metro One Private Limited – में उसकी हिस्सेदारी, जिसकी कीमत लगभग **₹1,575 करोड़** है, उसे प्रोविजनली अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई 2017-2019 के बीच कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के उल्लंघन के आरोपों के चलते की गई है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई

Reliance Infrastructure Limited को 28 जनवरी 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) मिला है। इस ऑर्डर के तहत, ED ने कंपनी की शेयरहोल्डिंग को अटैच किया है, जिसमें BSES Yamuna Power Limited, BSES Rajdhani Power Limited, और Mumbai Metro One Private Limited जैसी महत्वपूर्ण Subsidiaries शामिल हैं। इन अटैच की गई हिस्सेदारी का कुल मूल्य करीब ₹1,575 करोड़ है।

ED के अनुसार, यह कार्रवाई 2017 से 2019 के बीच PMLA के कथित उल्लंघन के संबंध में की गई है। PMLA के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर ED को अपराध की आय माने जाने वाली संपत्तियों को फ्रीज करने का अधिकार देता है, ताकि उन्हें छिपाने या नष्ट करने से रोका जा सके। यह अटैचमेंट आदेश शुरू में 180 दिनों के लिए वैध होता है और इसे एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी से कन्फर्मेशन की आवश्यकता होती है।

R-Infra के लिए क्या हैं खतरे?

इन मुख्य Subsidiaries की शेयरहोल्डिंग अटैच होने से Reliance Infrastructure के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। BSES Yamuna Power और BSES Rajdhani Power बिजली वितरण की महत्वपूर्ण इकाइयाँ हैं, जबकि मुंबई मेट्रो वन एक प्रमुख शहरी परिवहन लाइन का संचालन करती है। इन कंपनियों के शेयरों पर R-Infra के अधिकार का इस्तेमाल न कर पाना, कॉर्पोरेट गवर्नेंस, ऑपरेशनल कंट्रोल और भविष्य की रणनीतिक योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।

कंपनी ने कहा है कि वह लीगल एडवाइस लेगी और शेयरहोल्डर्स के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगी। निवेशक अब ED की अगली कार्रवाई और एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि इस कानूनी और वित्तीय अनिश्चितता का R-Infra के स्टॉक पर क्या असर पड़ता है। बता दें कि यह मामला रिलायंस ग्रुप की अन्य कंपनियों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांचों के व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है, जिनमें पहले भी बड़ी संपत्ति अटैच की जा चुकी हैं।

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