Reliance ने क्यों किया ईरानी तेल खरीद से इनकार?
Reliance Industries लिमिटेड ने स्पष्ट किया है कि कंपनी ने ईरानी क्रूड ऑयल खरीदने की किसी भी रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है। एक स्टेटमेंट में, कंपनी ने इन दावों को "बेबुनियाद" और "भ्रामक" बताते हुए खारिज कर दिया। यह खंडन रॉयटर्स (Reuters) की उन खबरों के बाद आया है जिनमें कहा गया था कि Reliance ने नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (National Iranian Oil Company) से लगभग 5 मिलियन बैरल ईरानी क्रूड ऑयल खरीदा है।
शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह खरीद अमेरिकी सेंक्शन्स वेवर (U.S. sanctions waiver) के तहत हुई थी, जो 20 मार्च तक लोड किए गए और 19 अप्रैल तक डिलीवर होने वाले तेल के लिए था। Reliance, जो दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स (refining complex) चलाती है, का कहना है कि उन्होंने ऐसी किसी भी डील की पुष्टि नहीं की है। कंपनी का यह कदम मार्केट में किसी भी तरह की अटकलों से बचने और अपनी प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।
मार्केट की चाल और रिफाइनर्स की स्ट्रेटेजी
यह खंडन ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी ईरान के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने के लिए अस्थायी सेंक्शन्स वेवर की अनुमति दे रहा है। वहीं, भारत की अन्य प्रमुख रिफाइनर्स, जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Bharat Petroleum Corporation Limited), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Hindustan Petroleum Corporation Limited), रूसी क्रूड ऑयल को सोर्स करने में सक्रिय रही हैं।
शेयर की चाल और विश्लेषकों का नजरिया
बुधवार, 25 मार्च 2026 को Reliance के शेयर ₹1,412.55 पर बंद हुए थे, जिसमें 0.08% की मामूली बढ़त देखी गई थी। कंपनी की मार्केट कैप (market capitalization) लगभग ₹19.11 ट्रिलियन है।
इसके बावजूद, कई ब्रोकरेज हाउसेज (brokerage houses) Reliance के आउटलुक को लेकर पॉजिटिव हैं। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने स्टॉक पर "कन्विक्शन बाय" (Conviction Buy) रेटिंग को बरकरार रखा है और अपने प्राइस टारगेट (price target) को बढ़ाकर ₹1,835 कर दिया है। मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) ने भी ₹1,750 के टारगेट के साथ "बाय" (Buy) रेटिंग दी है। विश्लेषकों का औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस ₹1,719 है।
कंपनी की एनर्जी और पेट्रोकेमिकल सेगमेंट में मजबूत परफॉर्मेंस, खासकर टाइट प्रोडक्ट मार्केट्स और पेट्रोकेमिकल वॉल्यूम ग्रोथ की उम्मीदों के चलते, एनालिस्ट्स का भरोसा बना हुआ है।