Raymond Share Price: निवेशकों की चांदी! Q3 में **18%** रेवेन्यू ग्रोथ, भविष्य के लिए बड़ी योजनाएं

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Raymond Share Price: निवेशकों की चांदी! Q3 में **18%** रेवेन्यू ग्रोथ, भविष्य के लिए बड़ी योजनाएं
Overview

Raymond Limited ने Q3 FY26 में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कुल रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले **18%** बढ़कर **₹580 करोड़** पर पहुंच गया है। इस ग्रोथ में कंपनी के एयरोस्पेस एंड डिफेंस और ऑटो कंपोनेंट्स डिवीज़न का अहम योगदान रहा।

नतीजों पर एक नज़र

Raymond Limited के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी की कुल आय साल-दर-साल (YoY) 18% की उछाल के साथ ₹580 करोड़ दर्ज की गई।

मुख्य आंकड़े (Q3 FY26):

  • कुल आय: ₹580 करोड़ (+18% YoY)
  • EBITDA: ₹83 करोड़ (+27.6% YoY), जो पिछले साल की Q3 में ₹65 करोड़ था।
  • EBITDA मार्जिन: 14.3% पर पहुंच गया, जो Q3 FY25 में 13.3% था।

वहीं, नौ महीनों (9M FY26) के नतीजों पर देखें तो कुल आय 13% बढ़कर ₹1,699 करोड़ रही। हालांकि, इस अवधि का EBITDA मार्जिन 14.7% पर रहा, जो पिछले साल की 9M FY25 के 15.8% से कम है। कंपनी मैनेजमेंट ने इसके पीछे नॉन-ऑपरेटिंग आय में कमी को वजह बताया है।

किन डिवीज़न ने दिखाया दम?

  • एयरोस्पेस एंड डिफेंस (JKMGAL): इस सेगमेंट ने ज़बरदस्त परफॉरमेंस दी। Q3 FY26 में रेवेन्यू 49% की तेज़ी के साथ ₹105 करोड़ रहा। EBITDA में 39% की ग्रोथ दर्ज की गई, जो ₹19 करोड़ रहा।
  • प्रिसिजन टेक्नोलॉजी & ऑटो कंपोनेंट्स (JKMPTL): इस डिवीज़न ने 15% की सालाना ग्रोथ दर्ज की और रेवेन्यू ₹417 करोड़ रहा। EBITDA में तो 51% का ज़बरदस्त उछाल आया और यह ₹57 करोड़ पर पहुंच गया। मार्जिन में यह सुधार बढ़ी हुई सेल्स वॉल्यूम, प्रोडक्ट मिक्स और एक बार की ज़मीन बिक्री से हुए ₹13 करोड़ के फायदे के कारण हुआ। हालांकि, लेबर कोड लागू होने से ₹14 करोड़ का एक बार का प्रभाव भी दर्ज किया गया।

पैसों की स्थिति और भविष्य की योजनाएं

Raymond Limited अपनी मजबूत वित्तीय सेहत के लिए जानी जाती है। कंपनी डेट-फ्री (कर्ज-मुक्त) है और दिसंबर 2025 तक ₹214 करोड़ के नेट कैश सरप्लस (नकदी का अधिशेष) के साथ काबिले तारीफ़ स्थिति में है।

आगे क्या?

मैनेजमेंट भविष्य को लेकर काफी आशावादी दिख रहा है। कंपनी ने अगले पांच सालों में आंध्र प्रदेश में ₹1,000 करोड़ का कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) करने की योजना बनाई है। इसमें एयरोस्पेस के लिए ₹500 करोड़ और ऑटो के लिए ₹430 करोड़ शामिल हैं।

कंपनी को ग्लोबल सप्लाई चेन में हो रहे बदलावों, जैसे 'चाइना प्लस वन' स्ट्रैटेजी और स्थानीयकरण (लोकलाइजेशन) के प्रयासों से भी फायदा मिलने की उम्मीद है। एयरोस्पेस का ऑर्डर बुक वर्तमान वार्षिक रेवेन्यू का 2.5x से 3x है और इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

मैनेजमेंट का लक्ष्य एयरोस्पेस के लिए 23-25% और ऑटो कंपोनेंट्स के लिए 15% से ऊपर EBITDA मार्जिन हासिल करना है।

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