Ratnaveer Precision Engineering के शेयरों में आज **14%** की जबरदस्त तेजी देखी गई। कंपनी ने पहली तिमाही में अपने नेट प्रॉफिट में **22%** का इजाफा दर्ज कर **₹18.24 करोड़** का मुनाफा कमाया है। साथ ही, कंपनी **₹472 करोड़** के बड़े निवेश के साथ कॉपर क्लैड लैमिनेट (Copper Clad Laminate) के उत्पादन में उतरने का ऐलान किया है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स मटेरियल सेक्टर में उसकी एक बड़ी एंट्री है।
Detailed Coverage
Q1 में मुनाफे की बहार
Ratnaveer Precision Engineering के शेयरों ने सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 14% की छलांग लगाते हुए ₹204 पर कारोबार किया। यह उछाल कंपनी द्वारा जून 2026 को समाप्त तिमाही के नतीजों के ऐलान के बाद आया है। कंपनी ने पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में कमाई और रेवेन्यू दोनों में वृद्धि दर्ज की है।
कंपनी ने तिमाही के लिए ₹18.24 करोड़ का नेट प्रॉफिट बताया है, जो पिछले साल के ₹14.95 करोड़ से काफी ज्यादा है। वहीं, ऑपरेशंस से रेवेन्यू 19% बढ़कर ₹315 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि जून 2025 तिमाही में यह ₹265 करोड़ था। यह परफॉरमेंस कंपनी के स्टेनलेस स्टील और स्पेशलिटी इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स के कारोबार को दर्शाती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स में बड़ा निवेश
इन फाइनेंशियल नतीजों के साथ, Ratnaveer Precision ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में एक बड़ी पूंजीगत विस्तार की घोषणा की है। कंपनी ₹472.34 करोड़ के निवेश से कॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL) मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने की योजना बना रही है। कॉपर क्लैड लैमिनेट, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCBs) बनाने के लिए एक मूलभूत मटेरियल है, जो कंज्यूमर डिवाइस से लेकर इंडस्ट्रियल मशीनरी तक, हर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट का अहम हिस्सा होता है।
इस प्रोजेक्ट को गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी के तहत सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा, कंपनी सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत अगले तीन सालों में ₹338 करोड़ का निवेश करने वाली है। ये कदम कंपनी के लिए एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देते हैं, क्योंकि यह पारंपरिक स्टेनलेस स्टील उत्पादों पर अपनी निर्भरता कम करके हाई-वैल्यू वाले इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स की ओर बढ़ना चाहती है।
आगे की राह और चुनौतियां
इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर कंपनी का यह कदम प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी राष्ट्रीय पहलों के साथ जुड़ा हुआ है। हालांकि, सरकारी नीतियां अक्सर निर्माताओं को फाइनेंशियल सपोर्ट या टैक्स बेनिफिट देती हैं, लेकिन निवेशकों को कंपनी की नई, हाई-टेक प्रोडक्ट सेगमेंट में बदलने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
इस पैमाने की एक परियोजना को पूरा करना—CCL प्रोजेक्ट और ECMS निवेश को मिलाकर ₹800 करोड़ से अधिक का कुल निवेश—कंपनी के आकार के हिसाब से एक बड़ी जिम्मेदारी है। निवेशक प्रोजेक्ट शुरू होने की समय-सीमा, कंपनी इस भारी पूंजीगत खर्च को कैसे फंड करेगी, और क्या इसके नतीजतन कर्ज बढ़ेगा, इन सब पर नजर रख सकते हैं। इस हाई-स्पेंडिंग पीरियड के दौरान प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना शेयरधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू होगा। इस कदम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी इन विशेष सामग्रियों का निर्माण और बिक्री प्रतिस्पर्धी बाजार में सफलतापूर्वक कर पाती है या नहीं, जहां वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का एक बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट किया जाता है।
