Ratnaveer Precision Engineering के शेयर आज ₹215.50 के स्तर पर पहुंच गए, जो कि पिछले 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर है। कंपनी के तिमाही नतीजों में **22%** का उछाल और इलेक्ट्रॉनिक्स-ग्रेड मटेरियल में विस्तार की योजना इस तेजी की मुख्य वजह बताई जा रही है।
दमदार नतीजों से शेयर में तूफानी तेजी
Ratnaveer Precision Engineering के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी के शेयर आज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ₹215.50 के स्तर को छूकर पिछले 52 हफ्तों का नया हाई बनाने में कामयाब रहे। यह लगातार दूसरे दिन की तेजी है, जिसमें स्टॉक करीब 15% चढ़ चुका है। इस जोरदार उछाल की वजह कंपनी द्वारा जून 2026 तिमाही के लिए जारी किए गए शानदार वित्तीय नतीजे हैं।
नेट प्रॉफिट में 22% की बढ़त
कंपनी ने इस तिमाही में 18.24 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के 14.95 करोड़ रुपये की तुलना में 22.01% अधिक है। वहीं, रेवेन्यू (Revenue) भी 19% बढ़कर 315 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल 265 करोड़ रुपये था। एक स्मॉल-कैप इंजीनियरिंग कंपनी के लिए यह प्रदर्शन प्रोडक्शन कॉस्ट को मैनेज करते हुए रेवेन्यू बढ़ाने की क्षमता को दिखाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बड़ा कदम
सिर्फ मौजूदा नतीजों पर ही नहीं, Ratnaveer Precision Engineering अब अपने बिजनेस को हाई-वैल्यू मटेरियल की ओर मोड़ रही है। कंपनी ने कॉपर क्लैड लैमिनेट (Copper Clad Laminate) प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण मटेरियल की सप्लाई करेगा। इस प्रोजेक्ट के लिए गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी के तहत 472.34 करोड़ रुपये के निवेश को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।
यह योजना अगले तीन सालों में 338 करोड़ रुपये खर्च करके लोकल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने का हिस्सा है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी सरकारी पहलों के साथ जुड़कर कंपनी अपने पारंपरिक इंजीनियरिंग बिजनेस पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है।
निवेशकों के लिए खास बातें
इलेक्ट्रॉनिक्स में यह बड़ा कदम रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन निवेशकों को इस बड़े कैपिटल स्पेंडिंग से जुड़े एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) पर नजर रखनी होगी। अगले तीन सालों में 338 करोड़ रुपये के इस खर्च का कर्ज और कैश फ्लो पर क्या असर पड़ेगा, यह भविष्य की रिपोर्ट्स में देखना अहम होगा। साथ ही, नए प्रोजेक्ट की सफलता कंपनी की इलेक्ट्रॉनिक्स-ग्रेड मटेरियल मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी, जो कि स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स की तुलना में काफी तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। शेयरधारकों को यह भी देखना होगा कि कंपनी नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बढ़ाते हुए अपने मौजूदा प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाती है या नहीं।
