Ram Ratna Wires ने जून तिमाही के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी के नेट प्रॉफिट में **121%** का शानदार उछाल दर्ज किया गया है। यह बढ़कर **₹35.2 करोड़** हो गया है। कंपनी का रेवेन्यू भी **89%** बढ़कर **₹1,853.3 करोड़** पर पहुंच गया है।
Ram Ratna Wires के मुनाफे में तूफानी तेजी
Ram Ratna Wires ने 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर की दमदार शुरुआत की है। जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के नतीजों में कंपनी के प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 120.8% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले साल की इसी तिमाही के ₹15.9 करोड़ से बढ़कर ₹35.2 करोड़ हो गया है।
इस शानदार ग्रोथ के पीछे कंपनी के रेवेन्यू में आई 88.6% की भारी बढ़ोतरी का बड़ा हाथ है। ऑपरेशन से होने वाली कमाई ₹982.5 करोड़ से बढ़कर ₹1,853.3 करोड़ पर पहुंच गई है।
कॉपर ट्यूब्स बिजनेस का कमाल
कंपनी के नतीजों में कॉपर ट्यूब्स बिजनेस का अहम योगदान रहा है, जो अब कुल रेवेन्यू का 26% हिस्सा है। एयर कंडीशनिंग, रेफ्रिजरेशन और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन्स जैसे सेक्टरों में विस्तार करके, Ram Ratna Wires अपनी पुरानी वायर मैन्युफैक्चरिंग की निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रही है। यह डाइवर्सिफिकेशन निवेशकों के लिए ट्रैक करने लायक है, क्योंकि इससे कंपनी को एक स्टेबल रेवेन्यू बेस मिल सकता है।
EBITDA और मार्जिन में सुधार
ऑपरेशनल परफॉर्मेंस भी सुधरी है, EBITDA 109% बढ़कर ₹89.6 करोड़ हो गया। EBITDA मार्जिन बढ़कर 4.8% हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 4.4% था। इसी तरह, नेट प्रॉफिट मार्जिन 1.6% से बढ़कर 1.9% हो गया। हालांकि ये मार्जिन अभी भी सिंगल डिजिट में हैं, लेकिन बढ़ी हुई सेल्स वॉल्यूम के साथ प्रॉफिट में हुए आनुपातिक सुधार को दर्शाता है।
आगे क्या देखें?
कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने और सब्सिडियरी और ज्वाइंट वेंचर ऑपरेशंस को मजबूत करने में निवेश कर रही है। यह कैपिटल स्पेंडिंग पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिफिकेशन जैसे सेक्टरों से लॉन्ग-टर्म डिमांड को भुनाने के लिए है। निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि कंपनी अपनी बैलेंस शीट पर दबाव डाले बिना इन प्रोजेक्ट्स को कैसे फंड करती है।
आगे चलकर, निवेशकों को कॉपर ट्यूब्स सेगमेंट में डिमांड की स्थिरता और प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने के साथ-साथ कंपनी की डेट मैनेजमेंट क्षमता पर नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च या कूलिंग सॉल्यूशंस से जुड़ी सरकारी नीतियों में कोई भी बदलाव आने वाले समय में डिमांड पर असर डाल सकता है।
