मुनाफे में कैसे आई कंपनी? Ram Ratna Wires के तिमाही नतीजों ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। कंपनी ने Q3 FY26 में अपने रेवेन्यू में 43.8% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की है, जो ₹1,277.9 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, नेट प्रॉफिट (PAT) में 72.5% का जबरदस्त उछाल देखकर ₹31.6 करोड़ का आंकड़ा पार हो गया। EBITDA में भी 84.9% की बड़ी तेजी देखने को मिली, जो ₹72.0 करोड़ रहा। मार्जिन में सुधार साफ दिखा, EBITDA मार्जिन 5.6% (पिछले साल 4.4% से) और PAT मार्जिन 2.5% (पिछले साल 2.1% से) हो गया।
9 महीने के नतीजे और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ
पिछले नौ महीनों (9M FY26) में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस अवधि में रेवेन्यू 25.9% बढ़कर ₹3,423.8 करोड़ हुआ, जबकि PAT में 34.6% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹69.4 करोड़ रहा। कंपनी का पिछले 5 सालों (FY21-FY25) का ट्रैक रिकॉर्ड भी शानदार है, जिसमें रेवेन्यू और EBITDA दोनों का CAGR (कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) 20% और 21% रहा है।
विस्तार की रणनीति और वित्तीय बोझ
कंपनी हाई-मार्जिन वाले सेग्मेंट्स जैसे कॉपर ट्यूब्स, वायर्स और स्ट्रिप्स पर फोकस कर रही है, जिसका असर ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन में भी दिखा (Q3 FY26 में 10.8%, पिछले साल 9.7%)। बिवाड़ी और जारोड प्लांट में कैपेसिटी बढ़ाने पर बड़ा निवेश किया जा रहा है, ताकि इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन में कंपनी अपनी पोजिशन मजबूत कर सके।
हालांकि, इस विस्तार के साथ कंपनी पर कर्ज का बोझ भी बढ़ा है। FY25 में नेट डेट/इक्विटी रेश्यो बढ़कर 0.34 हो गया, जो FY24 में 0.20 था। कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) में बड़ी बढ़ोतरी के चलते FY25 में इन्वेस्टिंग एक्टिविटीज के लिए ₹268.0 करोड़ का आउटफ्लो हुआ, जिसके नतीजे में लगभग ₹40.7 करोड़ का नेगेटिव फ्री कैश फ्लो (FCF) दर्ज किया गया।
चिंता का बड़ा कारण: लो इंटरेस्ट कवर रेश्यो
लेकिन, निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय इंटरेस्ट कवर रेश्यो है। FY25 के लिए यह रेश्यो घटकर केवल 1.81x रह गया (PBT ₹97.2 करोड़ / फाइनेंस कॉस्ट ₹53.7 करोड़)। इसका मतलब है कि कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट, उसके इंटरेस्ट पेमेंट को चुकाने के लिए बहुत ही मामूली अंतर से ही काफी है। यह एक बड़ा रिस्क है, खासकर अगर मार्केट की स्थिति खराब हुई या कंपनी के नतीजों में गिरावट आई।
आगे का रास्ता और मुख्य रिस्क
Ram Ratna Wires इलेक्ट्रिक कंपोनेंट्स की डोमेस्टिक डिमांड का फायदा उठाने के लिए अच्छी पोजिशन में है और इंपोर्ट पर भारत की निर्भरता कम करना चाहता है। JVs और सब्सिडियरी के जरिए BLDC मोटर्स और विंड टर्बाइन टावर्स जैसे नए सेग्मेंट्स में विस्तार भी कंपनी के लिए सकारात्मक है। लेकिन, विस्तार योजनाओं का एग्जीक्यूशन, गलाकाट कॉम्पिटिशन और सबसे अहम, लो इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो, ऐसे बड़े रिस्क हैं जिन पर निवेशकों को बारीकी से नजर रखनी चाहिए।