राजेश पावर सर्विसेज लिमिटेड (Rajesh Power Services Limited) को गुजरात में पावर नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए ₹653.12 करोड़ का एक बड़ा टर्नकी कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इस प्रोजेक्ट के तहत अगले 18 महीनों में गुजरात के चार जिलों में ओवरहेड लाइनों को अंडरग्राउंड केबल में बदला जाएगा।
क्या है नया प्रोजेक्ट?
सरकारी कंपनी पश्चिम गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (PGVCL) ने राजेश पावर सर्विसेज को यह बड़ा ऑर्डर दिया है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य काम मौजूदा 11 kV की ओवरहेड पावर लाइनों को अंडरग्राउंड केबल नेटवर्क में बदलना है। यह काम गुजरात के चार अहम जिलों - भावनगर, अंजार, जूनागढ़ और पोरबंदर में किया जाएगा।
प्रोजेक्ट का दायरा और समय-सीमा
यह एक टर्नकी कॉन्ट्रैक्ट है, जिसका मतलब है कि कंपनी डिजाइन से लेकर सप्लाई और कंस्ट्रक्शन तक की पूरी जिम्मेदारी संभालेगी। इस प्रोजेक्ट में सिर्फ केबल बिछाना ही नहीं, बल्कि पावर डिस्ट्रीब्यूशन को बेहतर बनाने के लिए रिंग मेन सिस्टम (Ring Main System) भी लगाना शामिल है। साथ ही, कंपनी को GIS मैपिंग और एसेट टैगिंग का काम भी सौंपा गया है, ताकि नई इंफ्रास्ट्रक्चर की लोकेशन और मेंटेनेंस का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सके। इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
निवेशकों के लिए खास बातें
इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनियों के लिए समय पर प्रोजेक्ट पूरा करना बहुत जरूरी होता है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस सेक्टर में मुनाफा प्रोजेक्ट को तय समय सीमा में और बिना लागत बढ़े पूरा करने पर निर्भर करता है। इस नए ऑर्डर से राजेश पावर सर्विसेज की कमाई की संभावना बढ़ी है, लेकिन असली फायदा प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन की स्पीड और अगले डेढ़ साल में कॉपर या एल्युमीनियम जैसी कच्ची सामग्रियों की कीमतों पर निर्भर करेगा।
सेक्टर का माहौल और कंपनी का विस्तार
राजेश पावर सर्विसेज पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में काम करती है, जहां सरकार ग्रिड को आधुनिक बनाने और बिजली के नुकसान को कम करने पर जोर दे रही है। ओवरहेड लाइनों को अंडरग्राउंड केबल में बदलने से बिजली चोरी कम होगी, खराब मौसम में बिजली कटौती घटेगी और शहरी इलाकों में सुरक्षा बढ़ेगी। गुजरात जैसे अपने होम स्टेट में इतने बड़े कॉन्ट्रैक्ट जीतना कंपनी के लिए एक अच्छी खबर है।
कंपनी की गुजरात के अलावा राजस्थान, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में भी मौजूदगी है। कंपनी की लंबी अवधि की वित्तीय सेहत इस बात पर निर्भर करेगी कि वह नए ऑर्डर बुक करती रहे और अपना कर्ज नियंत्रण में रखे। जैसे-जैसे कंपनी इस 18 महीने के प्रोजेक्ट पर काम करेगी, शेयरधारकों को प्रोजेक्ट की प्रगति, बड़े ऑर्डर्स का कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर असर और काम के साथ-साथ कैश फ्लो की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।
