Raghav Productivity Enhancers ने TRL Krosaki के साथ मिलकर ओडिशा में **₹100 करोड़** का प्लांट लगाने का ऐलान किया है। इस जॉइंट वेंचर का लक्ष्य कंपनी की मार्केट हिस्सेदारी को दोगुना कर **30%** तक पहुंचाना है, लेकिन इस अच्छी खबर के बावजूद 7 सितंबर, 2026 को शेयर **7%** तक टूट गया।
विस्तार की रणनीति
Raghav Productivity Enhancers Limited (RPEL) ने TRL Krosaki Refractories के साथ 80:20 के अनुपात में जॉइंट वेंचर का ऐलान किया है। कंपनी ओडिशा में एक नया ग्रीनफील्ड प्लांट लगाएगी, जो मुख्य रूप से स्टील इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले 'सिलिका रामिंग मास' का उत्पादन करेगा।
क्यों है यह प्लांट अहम?
वर्तमान में भारत का इंडक्शन फर्नेस मार्केट मुख्य रूप से पूर्वी भारत में केंद्रित है। अभी कंपनी का सारा उत्पादन राजस्थान से होता है, जिससे फ्रेट (परिवहन) लागत काफी बढ़ जाती है। ओडिशा प्लांट से कंपनी को दो बड़े फायदे होंगे:
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: डिमांड सेंटर के करीब प्लांट होने से खर्च घटेगा।
- बड़ी क्षमता: इस नए प्लांट की क्षमता 350,000 मीट्रिक टन सालाना होगी, जिससे कंपनी का मार्केट शेयर 15% से बढ़कर 30% होने का लक्ष्य है।
निवेशक क्यों हैं सतर्क?
Raghav Productivity एक कर्ज-मुक्त कंपनी है और इसके मार्जिन्स भी काफी हेल्दी रहे हैं। हालांकि, शेयर में 7% की गिरावट यह संकेत देती है कि निवेशक कंपनी के महंगे वैल्युएशन और भविष्य के रिस्क को लेकर चिंतित हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
निवेशकों को अब प्रोजेक्ट के निष्पादन (execution) पर नजर रखनी होगी। कंपनी ने प्लांट शुरू करने के लिए 12 महीने का समय तय किया है, और पूरी क्षमता तक पहुंचने में ढाई साल का समय लग सकता है। राजस्थान के बाहर पहली बार बड़े स्तर पर काम करने की चुनौतियों और स्टील सेक्टर की मांग को ट्रैक करना शेयरधारकों के लिए अगले कुछ क्वार्टर्स में जरूरी होगा।
