तिमाही नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
RITES Limited ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही (Q3FY26) के नतीजे जारी किए हैं, जो कंपनी की मजबूत परफॉरमेंस को दर्शाते हैं। समेकित आधार पर, कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹635 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 5.7% ज्यादा है। वहीं, कुल रेवेन्यू ₹609 करोड़ दर्ज किया गया, जिसमें 3.4% की बढ़ोतरी देखी गई।
कंपनी के लिए सबसे बड़ी खबर EBITDA में 18.9% की शानदार बढ़ोतरी है, जो ₹144 करोड़ पर पहुंच गया। समेकित EBITDA मार्जिन 20.8% पर मजबूत बने हुए हैं। प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में 7.0% का इजाफा हुआ और यह ₹123 करोड़ रहा, जबकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 5.2% बढ़कर ₹107 करोड़ हो गया। PAT मार्जिन 16.6% पर स्थिर है।
स्टैंडअलोन और 9MFY26 के आंकड़े
स्टैंडअलोन (Standalone) इकाई की परफॉरमेंस भी पॉजिटिव रही। ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹576 करोड़ (+4.5% YoY) और कुल रेवेन्यू ₹592 करोड़ (+1.9% YoY) दर्ज किया गया। स्टैंडअलोन EBITDA में 18.3% की जोरदार उछाल के साथ यह ₹145 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि PAT 2.0% बढ़कर ₹95 करोड़ रहा।
फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले नौ महीनों (9MFY26) में, समेकित EBITDA 17.2% बढ़कर ₹396 करोड़ रहा, और PAT 11.6% बढ़कर ₹315 करोड़ पर पहुंच गया।
मार्जिन में सुधार और डिविडेंड का ऐलान
कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार मुख्य रूप से कंसल्टेंसी (Consultancy) और एक्सपोर्ट्स (Exports) जैसे सेगमेंट्स से मिले बेहतर योगदान के कारण हुआ है। 'अन्य आय' (Other Income) में कमी को पिछले साल के इंश्योरेंस क्लेम के न होने का नतीजा बताया गया है, जो सामान्य ऑपरेशनल आय को दर्शाता है। कंपनी ने शेयरधारकों को तोहफा देते हुए ₹1.90 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) घोषित किया है, जो 95.6% के पेआउट रेशियो को दर्शाता है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
RITES के लिए सबसे बड़ा पॉजिटिव संकेत ₹9,262 करोड़ का रिकॉर्ड ऑर्डर बुक है, जो 31 दिसंबर 2025 तक का है। Q3 FY26 में ₹1,100 करोड़ से अधिक के नए ऑर्डर मिलना और बोत्सवाना सरकार व आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड (APEDB) के साथ रणनीतिक MoUs (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर भविष्य की ग्रोथ की मजबूत उम्मीदें जगाते हैं। खासकर कंसल्टेंसी और एक्सपोर्ट्स में। मोज़ाम्बिक को दो लोकोमोटिव की सप्लाई ने एक्सपोर्ट कैपेबिलिटी को और मजबूत किया है।
हालांकि, बड़े प्रोजेक्ट्स की एग्जीक्यूशन टाइमलाइन, रेगुलेटरी अप्रूवल और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को प्रभावित करने वाले मैक्रोइकोनॉमिक हेडविंड्स जैसी चुनौतियाँ भी हो सकती हैं। आने वाले 1-2 तिमाहियों में इस ऑर्डर बुक को रेवेन्यू में बदलना और अंतर्राष्ट्रीय फुटप्रिंट का विस्तार जारी रखना कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
