RIR Power Electronics ने 2026-27 के पहले तिमाही में तगड़ी ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का रेवेन्यू **29%** बढ़कर **₹27.16 करोड़** हो गया है, जबकि मुनाफा **80%** से ज्यादा उछलकर **₹3.14 करोड़** पर पहुंच गया है।
RIR Power Electronics के नतीजे: मुनाफे में जबरदस्त तेजी
RIR Power Electronics के लिए 2026-27 का पहला फाइनेंशियल क्वार्टर बेहद शानदार रहा। कंपनी ने 80.59% की भारी बढ़ोतरी के साथ ₹3.14 करोड़ का नेट प्रॉफिट (PAT) दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹1.74 करोड़ था। वहीं, स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 29.28% का इजाफा देखने को मिला, जो ₹21.01 करोड़ से बढ़कर ₹27.16 करोड़ हो गया।
कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी में भी सुधार हुआ है। एडजस्टेड EBITDA 62.87% बढ़कर ₹4.71 करोड़ पर पहुंच गया, जिससे EBITDA मार्जिन 357 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 17.32% हो गया। PAT मार्जिन भी 8.14% से बढ़कर 11.23% हो गया। यह नतीजे कंपनी के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 16 जुलाई 2026 को डेब्यू करने के कुछ समय बाद आए हैं।
एक्सपोर्ट मार्केट में कदम और रिसर्च पर फोकस
इन शानदार नतीजों के अलावा, कंपनी ने 125mm 5kV SCR थायरिस्टर की 120 यूनिट्स का पहला विदेशी ऑर्डर हासिल किया है। यह कदम इंटरनेशनल मार्केट्स की ओर कंपनी का झुकाव दिखाता है। RIR Power Electronics सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी पर अपना रिसर्च फोकस भी बढ़ा रही है। सिलिकॉन यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर विकसित किए गए दो रिसर्च पेपर IEEE MWSCAS 2026 में पेश किए जाएंगे।
कंपनी ने ग्रोथ स्ट्रेटेजी को सपोर्ट करने के लिए मैनेजमेंट में भी बदलाव किए हैं। अनित शाह, जो एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और मर्जर एंड एक्विजिशन में महारत रखते हैं, उन्हें नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, विवेक पटेल 10 अगस्त 2026 से नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर बोर्ड में शामिल हुए हैं।
निवेशकों के लिए खास बातें: एग्जीक्यूशन और कैपेसिटी
हाल के नतीजे भले ही दमदार ऑपरेशनल परफॉर्मेंस दिखा रहे हों, लेकिन निवेशकों की निगाहें कंपनी के लॉन्ग-टर्म कैपिटल एलोकेशन पर टिकी हैं, खासकर ओडिशा में बन रहे सिलिकॉन कार्बाइड प्लांट पर। यह प्लांट कंपनी के भविष्य की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं का एक अहम हिस्सा है, लेकिन इसके एग्जीक्यूशन में कुछ रिस्क भी शामिल हैं। पावर कनेक्शन मिलने में देरी और प्रोडक्शन को सही लेवल पर लाने की जटिलताएं पहले भी चुनौतियां रही हैं।
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी कितनी जल्दी हाई कैपेसिटी यूटिलाइजेशन हासिल कर पाती है। पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स का मैन्युफैक्चरिंग कैपिटल-इंटेंसिव होता है, जिसमें बिजनेस को ब्रेक-ईवन पॉइंट पर लाने और प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने के लिए 60% से 65% के यूटिलाइजेशन रेट की जरूरत होती है। जैसे-जैसे कंपनी स्केल बढ़ाएगी, इस नए प्लांट की कैपिटल कॉस्ट को मैनेज करते हुए मार्जिन ग्रोथ बनाए रखना अहम होगा। मार्केट पार्टिसिपेंट्स यह भी देखेंगे कि क्या कंपनी डोमेस्टिक रेलवे और पावर सेक्टर की डिमांड पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार अधिक एक्सपोर्ट ऑर्डर हासिल कर पाती है या नहीं।
