RIR Power Electronics ने सितंबर तिमाही में **41.2%** की उछाल के साथ **₹4.45 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। बावजूद इसके, कंपनी का शेयर **52-हफ्ते के निचले स्तर** पर जा गिरा है, क्योंकि निवेशक बढ़ते खर्चों और घटते ऑपरेटिंग मार्जिन को लेकर आशंकित हैं।
मुनाफे के बावजूद गिरावट का क्या है कारण?
RIR Power Electronics के शेयर गिरकर ₹144.68 के 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। हालांकि कंपनी ने सितंबर तिमाही में शानदार परफॉर्मेंस दी है, जिसमें नेट प्रॉफिट 41.2% बढ़कर ₹4.45 करोड़ हो गया है। साथ ही, ऑपरेटिंग रेवेन्यू भी 32.5% बढ़कर ₹33.98 करोड़ रहा। लेकिन मार्केट के जानकारों का मानना है कि अच्छी कमाई के बाद भी शेयर में बिकवाली निवेशकों की चिंता को दर्शाती है।
मार्जिन पर दबाव और बढ़ते खर्च
कंपनी का नेट प्रॉफिट मार्जिन तो 12.50% पर सुधरा है, लेकिन ऑपरेटिंग मोर्चे पर चुनौतियां बरकरार हैं। कंपनी का एडजस्टेड EBITDA मार्जिन 36 बेसिस पॉइंट्स घटकर 16.65% रह गया है। इस गिरावट के पीछे बड़ी वजह एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन के खर्चे हैं, जिन्होंने बॉटम लाइन पर ₹1.03 करोड़ का असर डाला है। फिलहाल कंपनी की कमाई में बढ़त, बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के कारण फीकी पड़ती दिख रही है।
ओडिशा प्लांट और भविष्य की रणनीति
कंपनी का पूरा फोकस अब सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) टेक्नोलॉजी पर है। भुवनेश्वर में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो चुका है और सरकारी निरीक्षण भी पूरे हो चुके हैं। मैनेजमेंट का लक्ष्य इस फाइनेंशियल ईयर की तीसरी तिमाही में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करना है। यह कंपनी के लिए भारी निवेश का दौर है, और शेयरधारकों की नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह प्लांट उम्मीद के मुताबिक प्रोडक्शन शुरू कर पाएगा।
पिछले एक महीने में 23% की गिरावट
पिछले एक महीने में स्टॉक में 23% से ज्यादा की गिरावट आई है, जो ग्लोबल मार्केट में जारी अस्थिरता और जियोपॉलिटिकल रिस्क का नतीजा है। आने वाले समय में निवेशकों के लिए यह देखना सबसे जरूरी होगा कि क्या ओडिशा प्लांट का प्रोडक्शन कंपनी के मार्जिन को स्टेबलाइज करने में मदद कर पाएगा या नहीं।
