तिमाही में गिरावट, सालाना रिकॉर्ड मजबूत
REC Ltd. के फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजों में नेट प्रॉफिट 21.7% गिरकर ₹3,375 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹4,309 करोड़ था। इसी के साथ, कंपनी की कुल इनकम भी 5% घटकर ₹14,583 करोड़ रही, जबकि पिछले साल यह ₹15,348 करोड़ थी। यह तिमाही प्रदर्शन कंपनी के पूरे साल के रिकॉर्ड नतीजों से बिलकुल अलग है। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान, REC Ltd. ने ₹16,282 करोड़ (या ₹16,308.17 करोड़) का अब तक का सबसे बड़ा सालाना नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो FY24-25 की तुलना में थोड़ी बढ़त दिखाता है। यह तिमाही गिरावट साल के अंत के एडजस्टमेंट, प्रोविज़न या इंटरेस्ट इनकम पर अस्थायी दबाव का संकेत दे सकती है, न कि बिजनेस में कोई बड़ी गिरावट का।
डिविडेंड (Dividend) से मैनेजमेंट का भरोसा
शेयरधारकों को पुरस्कृत करने और तिमाही मुनाफे में गिरावट की चिंताओं को दूर करने के लिए, REC Ltd. ने ₹1.55 प्रति इक्विटी शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) घोषित किया है। अंतरिम डिविडेंड ₹7 प्रति शेयर को मिलाकर, FY25-26 के लिए कुल डिविडेंड ₹18.55 प्रति शेयर हो गया है। यह लगातार डिविडेंड भुगतान REC की वित्तीय सेहत और कैश जनरेशन में मैनेजमेंट के भरोसे को दर्शाता है। कंपनी का डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) लगभग 5.20% है, जो इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धी है।
सेक्टर की मजबूती और पीयर परफॉर्मेंस (Peer Performance)
REC भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में काम करती है, जिसे सरकार की मजबूत नीतियों का लाभ मिल रहा है। Nifty Infrastructure Index ने पिछले एक, तीन और पांच सालों में Nifty 50 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च से यह ग्रोथ संभव हुई है। इसी सेक्टर की कंपनी Power Finance Corporation (PFC) ने Q4 FY25-26 में 10.6% का मुनाफा बढ़ाकर ₹8,358 करोड़ दर्ज किया। REC का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings ratio) लगभग 5.77x है, जबकि PFC का 4.69x है। REC का मार्केट कैप करीब ₹983 बिलियन है।
लीवरेज (Leverage) और वोलेटिलिटी (Volatility) की चिंताएं
सालाना मजबूत प्रदर्शन और सेक्टर की हेडविंड के बावजूद, REC की वित्तीय संरचना पर करीब से नजर रखने की जरूरत है। कंपनी पर कर्ज का बोझ काफी ज्यादा है, जिसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 6.38 से 6.66 के बीच है, जो उच्च लीवरेज को दर्शाता है। हालांकि यह पावर फाइनेंसिंग में NBFCs के लिए सामान्य है, पर यह फाइनेंशियल रिस्क को बढ़ाता है। तिमाही मुनाफे में गिरावट, जो आंशिक रूप से कम ब्याज आय से जुड़ी है, यह संकेत दे सकती है कि प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव है या प्रोविज़न बढ़े हैं, जो सालाना आंकड़ों से स्पष्ट नहीं है। PFC का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) रेश्यो सुधरकर 1.94% हुआ था, जबकि REC की एसेट क्वालिटी स्थिर होने के बावजूद, इसके बड़े कर्ज को देखते हुए निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।
भविष्य का आउटलुक (Outlook) और एनालिस्ट्स (Analysts) की राय
आगे चलकर, REC भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा परिवर्तन (energy transition) और ग्रामीण विद्युतीकरण पर फोकस से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। विश्लेषकों का REC Ltd. के प्रति नजरिया बहुत पॉजिटिव है, और उन्होंने 'Strong Buy' रेटिंग दी है। ₹481.08 का औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट, मौजूदा ₹375-₹383 के भाव से 28-34% तक की उछाल का संकेत देता है। मैनेजमेंट का लोन बुक बढ़ाने पर जोर, खासकर रिन्यूएबल एनर्जी (जो 30% बढ़कर ₹75,347 करोड़ हो गई) और सस्टेनेबल ग्रोथ के प्रति प्रतिबद्धता इस पॉजिटिव आउटलुक को सपोर्ट करती है। REC का P/E रेश्यो 5.77x इसके ग्रोथ पोटेंशियल और सेक्टर आउटलुक की तुलना में आकर्षक है।
