Prostarm Info Systems Share: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! कंपनी हुई मालामाल, रेवेन्यू **110%** उछला, कर्ज़ किया खत्म!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Prostarm Info Systems Share: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! कंपनी हुई मालामाल, रेवेन्यू **110%** उछला, कर्ज़ किया खत्म!
Overview

Prostarm Info Systems Limited के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने तीसरी तिमाही में दमदार नतीजे पेश किए हैं, जहां उसका रेवेन्यू (Revenue) सालाना आधार पर **110%** बढ़कर **₹161 करोड़** पर पहुंच गया। सबसे बड़ी बात यह है कि कंपनी ने अपना कर्ज़ (Debt) लगभग चुका दिया है और अब वह नेट डेट-फ्री (Net Debt-Free) हो गई है।

Q3 में Prostarm Info Systems का जलवा

Prostarm Info Systems Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने रेवेन्यू (Revenue) में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। तीसरी तिमाही में इसका कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 110% बढ़कर ₹161 करोड़ रहा। पिछले तिमाही की तुलना में तो इसमें 141% का बड़ा उछाल देखा गया।

मुनाफे में 101% की छलांग, मार्जिन्स पर भी फोकस

इस शानदार टॉप-लाइन परफॉरमेंस का असर नेट प्रॉफिट (Net Profit) पर भी दिखा। कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) तीसरी तिमाही में 101% बढ़कर ₹15 करोड़ हो गया, जबकि PAT मार्जिन 9.28% रहा। EBITDA में भी 81% का सालाना उछाल देखकर ₹20 करोड़ दर्ज किया गया, और EBITDA मार्जिन 12.65% पर बना रहा।

हालांकि, मैनेजमेंट का कहना है कि पिछली तिमाही के मुकाबले मार्जिन में थोड़ी कमी कुछ खास प्रोजेक्ट्स की प्रॉफिट-शेयरिंग स्ट्रक्चर की वजह से थी। कंपनी को उम्मीद है कि EBITDA मार्जिन्स भविष्य में 12% से 15% के बीच रहेंगे।

नौ महीनों की बात करें तो रेवेन्यू 5% बढ़कर ₹281 करोड़ रहा, EBITDA 3% बढ़कर ₹35 करोड़ और PAT 13% बढ़कर ₹25 करोड़ दर्ज किया गया।

कर्ज़ हुआ खत्म, कंपनी हुई नेट डेट-फ्री!

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि कंपनी ने अपना बैलेंस शीट (Balance Sheet) काफी मजबूत कर लिया है। मार्च 2025 में जहां कंपनी पर ₹3.4 करोड़ का लॉन्ग-टर्म डेट था, वहीं नौ महीनों के आखिर तक यह घटकर सिर्फ ₹1.5 करोड़ रह गया है। इससे Prostarm Info Systems अब प्रभावी रूप से नेट डेट-फ्री (Net Debt-Free) हो गई है, जो कि वित्तीय स्थिरता के लिए एक बहुत बड़ा कदम है।

क्या हैं चुनौतियाँ?

हालांकि, कंपनी फिलहाल नेगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो (Negative Operating Cash Flow) का सामना कर रही है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि यह Q3 FY'27 से पॉजिटिव हो जाएगा। इसके अलावा, तीसरी तिमाही में Receivables (प्राप्त होने वाली रकम) करीब 190 दिनों पर थे। इसका कारण दिसंबर में बुक किया गया ₹160 करोड़ का एक बड़ा ऑर्डर है, जिसे मैनेजमेंट एक साइक्लिकल इवेंट बता रहा है। निवेशक आने वाली तिमाहियों में इसे सामान्य होते देखना चाहेंगे।

फ्यूचर ग्रोथ के लिए बड़ी प्लानिंग: BESS और UPS में विस्तार

Prostarm Info Systems भविष्य की ग्रोथ के लिए बड़े कदम उठा रही है। कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ा रही है, खासकर हाई-ग्रोथ वाले सेक्टर्स में।

  • BESS (Battery Energy Storage Systems): झज्जर में 1.2 GW की BESS फैसिलिटी लगभग तैयार है और Q4 FY'26 तक चालू हो जाएगी।
  • UPS मैन्युफैक्चरिंग: अहमदाबाद में UPS मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का विस्तार Q1 FY'27 तक पूरा हो जाएगा।

यह विस्तार 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी टेक्नोलॉजी में भी निवेश कर रही है, जैसे SAP B1 और Salesforce को लागू करना, और बेहतर ट्रेसिबिलिटी के लिए QR कोड लाना।

बड़े प्रोजेक्ट्स पर मिली जीत

कंपनी ने प्रमुख क्लाइंट्स जैसे Karnataka Power Transmission Corporation Limited, Bihar State Power Generation Company Limited, South Central Railway, Steel Authority of India (SAIL), और Hitachi Payment Services से BESS प्रोजेक्ट्स जीते हैं। ये ऑर्डर्स कंपनी की बढ़ती मौजूदगी को दर्शाते हैं।

ग्रोथ का लक्ष्य 20-25%

मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ईयर '26 (FY'26) के लिए 20-25% रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य रखा है, और उम्मीद है कि FY'27 में भी यह रफ्तार बनी रहेगी। कंपनी अगले कुछ महीनों में 5-8 नए वर्टिकल भी लॉन्च करने की योजना बना रही है।

कॉम्पिटिशन का माहौल

Prostarm Info Systems BESS और UPS जैसे डायनामिक सेक्टर्स में काम कर रही है, जहाँ कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है। BESS में Exide Industries और Delta Power Solutions जैसी कंपनियां हैं, वहीं UPS मार्केट में Luminous, Schneider Electric India और Siemens India जैसे बड़े खिलाड़ी हैं। Prostarm का घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर जोर और बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल करने की क्षमता, इसे मार्केट में हिस्सेदारी हासिल करने में मदद कर सकती है, बशर्ते यह अपने वर्किंग कैपिटल साइकल को मैनेज कर सके।

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