प्रमोटर की एंट्री vs. इंस्टीट्यूशनल की एग्जिट: बाजार उलझन में
13 फरवरी का दिन Apollo Pipes, SG Finserve और Honasa Consumer के लिए काफी अहम रहा, जहां बड़े ट्रांजैक्शन हुए। प्रमोटर एंटिटी S Gupta Holding ने जहां इन कंपनियों में नई हिस्सेदारी खरीदी, वहीं Mercer Global Investments Management जैसी इंस्टीट्यूशनल फर्म ने अपने शेयर बेचे। इस दो-तरफा एक्शन पर बाजार की प्रतिक्रियाएं भी एकदम अलग-अलग रहीं, जो साफ दिखाता है कि निवेशकों के लिए कंपनी के फंडामेंटल और वैल्यूएशन कितने मायने रखते हैं।
प्रमोटर का भरोसा और इंस्टीट्यूशनल का निकास
13 फरवरी को S Gupta Holding ने ओपन मार्केट में Apollo Pipes के 1.19% स्टेक खरीदे, जिसके लिए करीब ₹16.64 करोड़ खर्च किए। इन्होंने 5.25 लाख से ज्यादा शेयर औसतन ₹317 के भाव पर खरीदे। इसी के साथ, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) SG Finserve में भी 0.53% हिस्सेदारी ₹12.24 करोड़ में 3 लाख शेयरों के लिए करीब ₹408.26 प्रति शेयर के भाव पर खरीदी गई।
वहीं, दूसरी तरफ Mercer QIF Fund Plc ने Honasa Consumer (Mamaearth की पेरेंट कंपनी) से 19.04 लाख शेयर बेच दिए, जो कुल हिस्सेदारी का 0.58% था। यह सौदा करीब ₹58.82 करोड़ का था, जिसमें शेयर की कीमत औसतन ₹308.91 रही।
इन अलग-अलग स्ट्रेटेजिक मूव्स पर मार्केट ने भी अलग-अलग रिएक्शन दिया। Apollo Pipes का शेयर 1.29% चढ़कर ₹319.05 पर बंद हुआ। वहीं, SG Finserve में 2.18% की गिरावट आई और यह ₹405.40 पर आ गया। Honasa Consumer के शेयरों में इंस्टीट्यूशनल बिकवाली के बावजूद 0.74% का मामूली उछाल देखा गया और क्लोजिंग ₹301.45 पर हुई।
वैल्यूएशन और फंडामेंटल: अलग-अलग कहानी
बाजार की इन अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के पीछे मुख्य कारण इन कंपनियों का वैल्यूएशन और फाइनेंशियल हेल्थ है।
SG Finserve, जिसकी मार्केट कैप ₹2,266 करोड़ है, का वैल्यूएशन काफी आकर्षक लग रहा है। इसका पिछले 12 महीनों का पी/ई रेशियो (TTM P/E ratio) करीब 20.78x है, जो एनबीएफसी सेक्टर में काफी कॉम्पिटिटिव है। यह Bajaj Finance ( 34.80x) और Cholamandalm Investment ( 30.05x) जैसे बड़े खिलाड़ियों से काफी कम है। प्रमोटर होल्डिंग का बढ़कर 50.30% होना भी कंपनी में मैनेजमेंट के विश्वास को दर्शाता है।
PVC पाइप बनाने वाली Apollo Pipes का मार्केट कैप ₹1,405 करोड़ है, लेकिन इसका पी/ई रेशियो लगभग 86.5x है। यह इसके डायरेक्ट कॉम्पिटिटर्स Supreme Industries ( 58.88x) और Astral ( 83.25x) से कहीं ज्यादा है, और इंडस्ट्री के औसत 25.7x से भी काफी ऊपर है। यह हाई वैल्यूएशन तब है जब कंपनी ने दिसंबर 2025 की तिमाही में ₹3.26 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है।
Honasa Consumer, जिसकी मार्केट कैप करीब ₹9,800 करोड़ है, ने Q3 FY26 में दमदार नतीजे पेश किए। रेवेन्यू 16.23% बढ़कर ₹601.5 करोड़ और नेट प्रॉफिट 92.9% उछलकर ₹50.2 करोड़ रहा। इसके बावजूद, इसका पी/ई रेशियो अभी भी करीब 75x पर बना हुआ है। स्टॉक अपने आईपीओ प्राइस से भी नीचे ट्रेड कर रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक लंबी अवधि की ग्रोथ को लेकर अभी भी थोड़ा सतर्क हैं।
पुराना इतिहास और सेक्टर का ट्रेंड
13 फरवरी के डील्स से पहले भी Apollo Pipes के वैल्यूएशन को लेकर सवाल उठ रहे थे। 9 फरवरी के एनालिसिस में इसके प्रीमियम मल्टीपल्स और 'Strong Sell' रेटिंग का जिक्र था। ऐसे में प्रमोटर की खरीदारी के बावजूद शेयर में वैसी तूफानी तेजी न दिखना थोड़ा समझा जा सकता है।
SG Finserve के मामले में, प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़ना शेयर में आई गिरावट के विपरीत एक पॉजिटिव संकेत देता है। Honasa Consumer की Q3 परफॉर्मेंस भले ही मजबूत रही हो, लेकिन पहले आई ऑपरेशनल दिक्कतों (जैसे इन्वेंटरी राइट-ऑफ और डिस्ट्रीब्यूशन रीस्ट्रक्चरिंग) का असर अब भी स्टॉक पर दिख रहा है। 13 फरवरी को Honasa Consumer ने गिरते हुए Sensex को आउटपरफॉर्म किया, जो कंपनी की अपनी मजबूती को दर्शाता है।
जोखिम और चिंताएं
प्रमोटर के भरोसे के बावजूद, इन कंपनियों के लिए अभी भी कुछ जोखिम बने हुए हैं।
Apollo Pipes के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द इसका स्ट्रेच्ड वैल्यूएशन ( 86.5x P/E) है, जिसे इंडस्ट्री पीयर्स और मार्केट के मुकाबले जस्टिफाई करना मुश्किल है, खासकर पिछली तिमाही के लॉस और फरवरी की शुरुआत की 'Strong Sell' रेटिंग को देखते हुए। शेयर की कीमत बनाए रखने के लिए कमाई में भारी सुधार या वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट की जरूरत होगी।
SG Finserve में प्रमोटर की खरीदारी वाले दिन शेयर का गिरना यह संकेत दे सकता है कि बिकवाली का दबाव S Gupta Holding की खरीदारी से ज्यादा है, या मार्केट किसी और फैक्टर पर ध्यान दे रहा है। 16 फरवरी को होने वाली बोर्ड मीटिंग, जिसमें नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में बदलाव पर विचार हो सकता है, आगे और अनिश्चितता ला सकती है।
Honasa Consumer के लिए 75x का हाई पी/ई रेशियो एक बड़ी चिंता बनी हुई है, भले ही Q3 के नतीजे अच्छे रहे हों। एनालिस्ट्स के प्राइस टारगेट (जैसे ₹270) करेंट मार्केट प्राइस से काफी कम हैं, जो वैल्यूएशन की सस्टेनेबिलिटी को लेकर संदेह जताते हैं। पिछले ऑपरेशनल मुद्दे और स्टॉक का आईपीओ प्राइस तक न पहुंच पाना भी निवेशकों की सतर्कता को बढ़ाता है। हालांकि Emkay Global ने अनुमानों को अपग्रेड किया है, लेकिन हाई पी/ई यह दिखाता है कि भविष्य की ग्रोथ पहले से ही प्राइस में शामिल है।