बायोमैन्युफैक्चरिंग का हब
Praj Industries ने पुणे स्थित अपने Praj Matrix R&D सेंटर में एक बिलकुल नई, AI-संचालित प्रिसिजन फर्मेंटेशन (Precision Fermentation) लैबोरेटरी लॉन्च की है। इस सुविधा का मुख्य उद्देश्य हाई-कैपेसिटी बायोप्रोसेस (Bioprocess) को बेहतर बनाना है, जिससे दक्षता (efficiency) में सुधार हो, स्केल-अप (scale-up) के जोखिम कम हों और पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता (reliability) बढ़े। यह लैब Praj Industries और उसकी सहायक कंपनी Praj HiPurity Systems को फार्मास्यूटिकल्स (pharmaceuticals), खाद्य (food), कॉस्मेटिक्स (cosmetics), बायोफ्यूल्स (biofuels) और बेवरेज (beverages) जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए एडवांस्ड फर्मेंटेशन समाधान (fermentation solutions) प्रदान करने में मदद करेगी।
Praj HiPurity Systems खास तौर पर फार्मा और बायोटेक इंडस्ट्री के लिए ज़रूरी प्रिसिजन फर्मेंटर्स (precision fermenters) और अल्ट्रा-प्योर वॉटर सिस्टम (ultra-pure water systems) के लिए जानी जाती है। इन प्रक्रियाओं में AI का समावेश बायोरिएक्टर परफॉरमेंस (bioreactor performance) और प्रोडक्ट यील्ड (product yield) को ऑप्टिमाइज़ (optimize) करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अकादमिक-इंडस्ट्री के बीच रणनीतिक गठबंधन
इस लैब के उद्घाटन के साथ ही, Praj Industries ने बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल – नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस (BRIC-NCCS) के साथ एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए हैं। यह पार्टनरशिप भारत सरकार की BioE3 Initiative (Biotechnology for Economy, Environment, and Employment) का समर्थन करती है, जिसका प्रबंधन डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) करती है।
DBT के सेक्रेटरी, राजेश एस. गोखले ने कहा कि भारत की बायोइकोनॉमी को आगे बढ़ाने के लिए अकादमिक और इंडस्ट्री के बीच ऐसे पार्टनरशिप बेहद अहम हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की पहलें रिसर्च को लैब से निकालकर प्रैक्टिकल एप्लीकेशन तक ले जाने और बायोटेक्नोलॉजी में राष्ट्रीय विशेषज्ञता बनाने के लिए ज़रूरी हैं, जिससे इनोवेशन (innovation) को तेजी मिलेगी और देश की बायो-बेस्ड इकोनॉमी (bio-based economy) मजबूत होगी।
डीकार्बोनाइजेशन और इनोवेशन को बढ़ावा
Praj Industries के फाउंडर और चेयरमैन, प्रम ोद चौध ारी ने इस लैब को कंपनी के इनोवेशन पथ पर एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने समझाया कि यह बायोलॉजी, इंजीनियरिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी को मिलाकर स्केलेबल, लो-कार्बन समाधान (low-carbon solutions) तैयार करती है। BRIC-NCCS पार्टनरशिप के साथ मिलकर, यह काम लैब डिस्कवरी से कमर्शियल बायोमैन्युफैक्चरिंग (commercial biomanufacturing) की ओर बदलाव को गति देगा।
यह सुविधा भविष्य में अकादमिक और इंडस्ट्री के बीच सहयोग के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करेगी। यहां एडवांस्ड बायोप्रोसेसिंग स्किल्स (bioprocessing skills) विकसित करने, नए बायोमॉलिक्यूल्स (biomolecules) और माइक्रोबियल स्ट्रेन (microbial strains) की खोज करने, पीएचडी छात्रों के लिए प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देने और संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। BRIC-NCCS अपनी माइक्रोबियल रिसर्च, जीनोमिक्स (genomics) और सेल कल्चर कलेक्शन (cell culture collections) की विशेषज्ञता लाएगा, जो Praj की प्रोसेस डेवलपमेंट (process development) और हाई-प्योरिटी मैन्युफैक्चरिंग स्किल्स (high-purity manufacturing skills) के साथ मिलकर एक मजबूत टीम वर्क बनाएगा।
Praj Matrix, Praj Industries का इनोवेशन हब, 300 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट (patents) रखता है। बायोफ्यूल्स (biofuels), बायोपॉलिमर्स (biopolymers) और बायोबिटुमेन (biobitumen) में इसकी मौजूदा टेक्नोलॉजी ने डीकार्बोनाइजेशन (decarbonization) के प्रयासों में पहले ही महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो कंपनी के टिकाऊ समाधानों (sustainable solutions) के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
