नतीजों में दमदार परफॉरमेंस, नए आर्डर्स से बढ़ी रफ्तार
Power & Instrumentation (Gujarat) Limited ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही और नौ महीने की अवधि के लिए अपने वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी की कंसोलिडेटेड टोटल इनकम Q3 FY26 में ₹48.89 करोड़ रही, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 43.18% की जोरदार बढ़त दर्शाती है। तिमाही के दौरान कंपनी का EBITDA ₹6.16 करोड़ रहा, जो 12.6% का मार्जिन दिखाता है।
इस ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान ₹124.17 करोड़ के नए कॉन्ट्रैक्ट्स का रहा, जिनमें Revamped Distribution Sector Scheme (RDSS) के तहत मिले बड़े प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं। कंपनी के पास फिलहाल ₹450 करोड़ का ऑर्डर बुक है और वह ₹450 करोड़ के अतिरिक्त प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगा रही है।
भविष्य की राह और नए दांव
कंपनी का लक्ष्य अगले पांच सालों में सालाना रेवेन्यू ग्रोथ 30-35% बनाए रखना है। इसके लिए कंपनी स्पेशलाइज्ड मैन्युफैक्चरिंग में भी कदम रख रही है। इसकी सब्सिडियरी, Peaton Electricals, को 'Phibar' बसडक्ट सिस्टम के लिए CPRI अप्रूवल मिल गया है, जो हाई-लोड वातावरण जैसे डेटा सेंटर्स और एयरपोर्ट्स को टारगेट करेगा। इस नए प्रोडक्ट लाइन से भविष्य में कुल रेवेन्यू का 20-30% हिस्सा आने की उम्मीद है।
साथ ही, कंपनी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के क्षेत्र में EPC प्रोवाइडर के तौर पर विस्तार करने की संभावनाएं भी तलाश रही है।
सरकारी योजनाओं से मिला बड़ा सहारा
Power & Instrumentation (Gujarat) ने भारत सरकार की RDSS स्कीम के तहत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स हासिल किए हैं। हाल ही में, Ajmer Vidyut Vitran Nigam Limited (AVVNL) से ₹68.22 करोड़ और ₹102.78 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट्स मिले थे। कंपनी ने सितंबर 2025 में Peaton Electrical Company Limited में अपनी हिस्सेदारी 51.06% तक बढ़ाई थी, जिससे वह उसकी सब्सिडियरी बन गई। प्रमोटर ग्रुप ने जनवरी 2026 में वारंट कन्वर्जन के जरिए इक्विटी शेयर अलॉटमेंट पूरा किया, जिससे प्रमोटरों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
निवेशकों को किन बातों पर रखनी है नज़र?
मजबूत ऑर्डर बुक और नए कॉन्ट्रैक्ट्स की वजह से कंपनी की रेवेन्यू विजिबिलिटी अच्छी है। हालांकि, 95-100 दिनों के वर्किंग कैपिटल डेज को 90 दिनों से नीचे लाने पर ध्यान देना होगा। मैनेजमेंट ने मार्केट के तेजी से स्केल होने के कारण 'टेक्निकल लोगों की कमी' को एक चुनौती बताया है, जिस पर कंपनी काम कर रही है। कॉपर और एल्युमीनियम जैसे इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव भी एक फैक्टर है, लेकिन यह बड़े ऑर्डर्स में प्राइस वेरिएशन क्लॉज से कुछ हद तक मैनेज हो जाता है। मार्च 2024 में SEBI से एक एडजुडिकेशन ऑर्डर भी मिला है, जिसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
अन्य बड़ी कंपनियों से तुलना
Power & Instrumentation (Gujarat) इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) सेगमेंट में KEC International और Kalpataru Projects International Ltd. जैसी बड़ी और डायवर्सिफाइड कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है। जहां ये पीयर्स बड़े पैमाने पर काम करते हैं, वहीं P&I गुजरात RDSS जैसी सरकारी स्कीमों के तहत रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन और डिस्ट्रीब्यूशन मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट्स पर फोकस करके अपनी खास पहचान बना रही है।
प्रमुख आंकड़े और आगे क्या?
FY23 में जहां कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹145 करोड़ था, वहीं FY24 में यह बढ़कर ₹209 करोड़ हो गया। कंसोलिडेटेड PAT भी FY23 के ₹7 करोड़ से बढ़कर FY24 में ₹13.5 करोड़ हुआ। EBITDA मार्जिन 11-12.6% के आसपास स्थिर रहा है।
निवेशक अब कंपनी की 30-35% सालाना रेवेन्यू ग्रोथ के लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता पर नजर रखेंगे। बसडक्ट प्रोडक्ट लाइन का रेवेन्यू में सफल एकीकरण और वर्किंग कैपिटल डेज में कमी महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। साथ ही, BESS सेक्टर में विस्तार और 9-10% के PAT मार्जिन के लक्ष्य की ओर बढ़त पर भी बारीकी से नज़र रखी जाएगी।