Nuvama की इंजीनियरिंग स्टॉक्स पर राय: पावर ट्रांसमिशन में ₹7.93 लाख करोड़ का दांव

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AuthorAditya Rao|Published at:
Nuvama की इंजीनियरिंग स्टॉक्स पर राय: पावर ट्रांसमिशन में ₹7.93 लाख करोड़ का दांव

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Nuvama Wealth Management ने भारतीय इंजीनियरिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टर पर एक रिपोर्ट जारी की है। ब्रोकरेज का मानना है कि भारत के पावर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले **₹7.93 लाख करोड़** के भारी निवेश से इस सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। कंपनी ने CG Power और Thermax को खास तौर पर पसंद किया है, लेकिन हाई वैल्यूएशन और धीमी एग्जीक्यूशन स्पीड पर चिंता भी जताई है।

Nuvama की रिपोर्ट क्या कहती है?

Nuvama Wealth Management की नई रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारत का इंजीनियरिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में हो रहे विस्तार के साथ मिलकर अच्छी ग्रोथ दिखा सकता है। इस सेक्टर में, एनालिस्ट्स का CG Power और Thermax पर खास फोकस है। रिपोर्ट के मुताबिक, पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन (T&D) इंडस्ट्री ग्रोथ का मुख्य इंजन बनेगी। भारत के रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए FY36 तक इस सेक्टर में ₹7.93 लाख करोड़ से ज़्यादा का कैपिटल खर्च होने का अनुमान है।

₹7.93 लाख करोड़ का पावर ट्रांसमिशन गेम

भारत का लक्ष्य FY36 तक नॉन-फॉसिल फ्यूल एनर्जी कैपेसिटी को लगभग 900 गीगावाट तक बढ़ाना है। इस बड़े बदलाव के लिए एक मजबूत पावर ग्रिड की जरूरत होगी, जो रिन्यूएबल एनर्जी साइट्स से बिजली को कंज्यूमर्स तक पहुंचा सके। इसी वजह से ट्रांसमिशन सेक्टर में भारी निवेश की उम्मीद है। इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को होगा जो ट्रांसफॉर्मर, हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) सिस्टम और गैस इंसुलेटेड स्विचगियर (GIS) जैसे हाई-एंड इक्विपमेंट बनाती हैं। ये सब मॉडर्न पावर ग्रिड के लिए ज़रूरी हैं।

Nuvama को CG Power और Thermax क्यों पसंद हैं?

ब्रोकरेज फर्म CG Power और Thermax की ग्रोथ स्टोरीज को अलग-अलग देखती है। CG Power के लिए, रिपोर्ट में गैस इंसुलेटेड स्विचगियर में कंपनी के काम, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में एंट्री और रेलवे प्रोजेक्ट्स में भागीदारी जैसे विस्तार के क्षेत्रों को नोट किया गया है। वहीं, Thermax की बात करें तो, कंपनी की विजिबिलिटी में सुधार पर फोकस है। यह कंपनी पुराने, कम मुनाफे वाले प्रोजेक्ट्स को खत्म कर रही है और एक्सपोर्ट ऑर्डर्स बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, जिसे ब्रोकरेज मार्जिन के लिए पॉजिटिव मान रहा है।

वैल्यूएशन और एग्जीक्यूशन की सच्चाई

हालांकि, ट्रांसमिशन सेक्टर के लिए ग्रोथ का आउटलुक मजबूत है, रिपोर्ट निवेशकों को कंपनी के वैल्यूएशन को लेकर सावधान रहने की सलाह देती है। एनालिस्ट्स का कहना है कि हाई-वोल्टेज T&D सेगमेंट की कई फर्मों के शेयर की कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं, जिससे मौजूदा स्तरों से आगे और तेजी की गुंजाइश सीमित हो सकती है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग सेक्टर व्यापक चुनौतियों का सामना कर रहा है। डेटा सेंटर, मेटल और ऑयल एंड गैस जैसे उद्योगों में ऑर्डर इंक्वायरी तो अच्छी है, लेकिन असल एग्जीक्यूशन उम्मीद से धीमा रहा है। प्राइवेट कैपिटल प्रोजेक्ट्स के लिए नए ऑर्डर्स में साल-दर-साल 36% की ग्रोथ देखी गई है, लेकिन प्रोजेक्ट पूरे होने की स्पीड धीमी है, जिसमें केवल लगभग 10% की ग्रोथ दर्ज की गई है।

सेक्टर पर दबाव और रिस्क

निवेशकों को इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग सेक्टर पर असर डालने वाले दबावों से अवगत रहना चाहिए। कंपनियां फिलहाल कमोडिटी प्राइस इन्फ्लेशन और बढ़ते फ्रेट कॉस्ट जैसी चुनौतियों से निपट रही हैं, जो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकते हैं। इसके अलावा, T&D इक्विपमेंट की मजबूत मांग के कारण कंपनियों के मार्जिन में लगभग 20% तक का विस्तार हुआ है, लेकिन इन स्तरों को बनाए रखने के लिए लागत दबावों को प्रभावी ढंग से मैनेज करना होगा। डिफेंस सेक्टर में, जो इस बड़े स्पेस का हिस्सा है, परफॉर्मेंस मिली-जुली रही है, और कुछ कंपनियों को सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ रहा है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

जैसे-जैसे इंजीनियरिंग सेक्टर विकसित हो रहा है, निवेशकों को कुछ प्रमुख कारकों पर नज़र रखनी चाहिए। पहला, ऑर्डर बुक के बजाय प्रोजेक्ट्स के वास्तविक एग्जीक्यूशन को देखें। ऑर्डर बुक महत्वपूर्ण है, लेकिन मुनाफा तभी आता है जब प्रोजेक्ट पूरा और डिलीवर हो जाए। दूसरा, इन कंपनियों द्वारा इनपुट लागतों, जैसे कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स, को कैसे मैनेज किया जाता है, इस पर ध्यान दें। तीसरा, कंपनी के वैल्यूएशन की तुलना उनके लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पोटेंशियल से करें ताकि यह पता चल सके कि मौजूदा कीमत उचित है या नहीं। अंत में, प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर की रिकवरी पर मैनेजमेंट की टिप्पणी देखें, क्योंकि इससे पता चलेगा कि मांग असल काम में बदल रही है या नहीं।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.