Power Mech Projects: शानदार Q3 नतीजे, पर गाइडेंस में कटौती
Power Mech Projects Limited (PMPL) ने अपने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) की तीसरी तिमाही (Q3) में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 6% बढ़कर ₹1,433 करोड़ रहा। इस दौरान EBITDA 8% की तेजी के साथ ₹173 करोड़ पर पहुंचा, और PAT (प्रॉफिट आफ्टर टैक्स) 15% की जोरदार उछाल के साथ ₹100 करोड़ दर्ज किया गया। PAT मार्जिन भी सुधरकर 7.02% हो गया, जो पिछले साल 6.47% था।
नौ महीने का प्रदर्शन और नकदी प्रवाह
यही नहीं, फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले नौ महीनों (दिसंबर 2025 तक) में भी कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 17% बढ़कर ₹3,987 करोड़ और EBITDA 23% बढ़कर ₹513 करोड़ पर पहुंच गया। इस अवधि में PAT 19% की वृद्धि के साथ ₹258 करोड़ रहा। कंपनी के ऑपरेटिंग कैश फ्लो में भी काफी सुधार देखा गया, जो पिछले साल के -₹253 करोड़ से बढ़कर इस बार ₹113 करोड़ सकारात्मक हो गया है। कंपनी का कर्ज स्तर भी नियंत्रण में है, जहां नेट कर्ज ₹233 करोड़ है और कर्ज-से-इक्विटी अनुपात (Debt-to-Equity Ratio) 0.35x का स्वस्थ स्तर पर है।
गाइडेंस में कटौती का कारण और भविष्य की रणनीति
इन मजबूत नतीजों के बावजूद, कंपनी ने कुछ प्रोजेक्ट्स में फंडिंग संबंधी दिक्कतों के कारण FY26 के लिए अपने रेवेन्यू गाइडेंस को ₹6,500 करोड़ से घटाकर ₹6,000 करोड़ कर दिया है। मैनेजमेंट ने UP वाटर डिविजन प्रोजेक्ट में आई इस समस्या का जिक्र किया है। हालांकि, कंपनी भविष्य को लेकर काफी आशावादी है और FY27 के लिए 20-25% के रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगा रही है। इस ग्रोथ को हासिल करने के लिए, Power Mech Projects अपनी सब्सिडियरी PM Green के जरिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) यानी ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में रणनीतिक रूप से विस्तार कर रही है। कंपनी बैक ऑफ प्लांट (BOP) ईपीसी (EPC) सेवाओं और ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस (O&M) को भी मजबूत कर रही है।
प्रमुख जीत और बाजार की संभावनाएं
कंपनी के मौजूदा बिजनेस मिक्स में घरेलू परिचालन 95% है, जिसमें पावर सेक्टर का योगदान लगभग 67-70% है। हाल ही में, कंपनी ने BHEL से सिंगरेनी थर्मल प्रोजेक्ट के लिए ₹2,550 करोड़ का एक बड़ा BOP EPC पैकेज जीता है। इसके अलावा, कंपनी ने बिल्ड-ओन-ऑपरेट मॉडल पर एक ग्रिड-स्केल BESS प्रोजेक्ट भी हासिल किया है, जो ऊर्जा भंडारण बाजार में इसके औपचारिक प्रवेश का संकेत देता है। भारतीय ऊर्जा भंडारण बाजार में रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन की बढ़ती जरूरत और सरकारी पहलों के चलते भारी वृद्धि की उम्मीद है।
जोखिम और आगे की राह
निकट अवधि में, FY26 के रेवेन्यू गाइडेंस में की गई कटौती कुछ परियोजनाओं में कार्यान्वयन या फंडिंग चुनौतियों की ओर इशारा करती है, जो एक संभावित जोखिम है। कंपनी का दीर्घकालिक भविष्य ऊर्जा भंडारण जैसे उभरते क्षेत्रों में उसके सफल विविधीकरण और पारंपरिक ईपीसी परियोजनाओं को हासिल करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करेगा।