एक्सपेंडिचर और कैपिटलाइजेशन टारगेट में बढ़ोतरी
कंपनी के बोर्ड ने FY26 के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) अनुमान को पिछले ₹32,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹35,000 करोड़ कर दिया है। इसी तरह, कैपिटलाइजेशन टारगेट को ₹22,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹25,000 करोड़ कर दिया गया है। यह बड़ा कदम पावर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट में तेजी लाने और नॉन-फॉसिल फ्यूल एनर्जी सोर्स को इंटीग्रेट करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
₹15 लाख करोड़ की विशाल प्रोजेक्ट पाइपलाइन
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) का अनुमान है कि FY2036 तक नॉन-फॉसिल कैपेसिटी के लिए ₹7.9 लाख करोड़ का ट्रांसमिशन Capex चाहिए होगा। इसके अलावा, अंडरसी केबल्स और ब्रह्मपुत्र बेसिन में भी कई प्रोजेक्ट्स की संभावना है। इन सबको मिलाकर, कंपनी की कुल प्रोजेक्ट पाइपलाइन अब ₹15 लाख करोड़ से अधिक हो गई है, जो पहले के ₹9.5–10 लाख करोड़ के अनुमान से काफी ज्यादा है। PGCIL को उम्मीद है कि वह इस भविष्य की पाइपलाइन का एक बड़ा हिस्सा, संभवतः 50% तक, हासिल कर लेगी। कंपनी के ग्रॉस फिक्स्ड एसेट्स ₹3 लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर चुके हैं।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी और एग्जीक्यूशन में सुधार
सरकारी भूमि मुआवजे के नियमों में हुए बदलावों के बाद राइट-ऑफ-वे (RoW) अधिग्रहण अब आसान हो गया है, जिससे प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन का रिस्क कम हुआ है और समय-सीमा भी छोटी हुई है। ट्रांसफार्मर और रिएक्टर जैसे उपकरणों की सप्लाई की दिक्कतें भी कम हो रही हैं क्योंकि डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ रही है। PGCIL ने अपने टेक्नीशियनों के ट्रेनिंग में भी निवेश किया है। अब प्रोजेक्ट्स 30-36 महीनों में पूरे किए जा रहे हैं, जिससे डिलीवरी तेज हुई है। सिस्टम की उपलब्धता 99.84% पर बनी हुई है। AI-आधारित डिफेक्ट डिटेक्शन और ड्रोन पेट्रोलिंग जैसी तकनीकों से ऑपरेशनल रिलायबिलिटी और भी बढ़ गई है। कंपनी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की भी तलाश कर रही है।
वैल्यूएशन और डिविडेंड पर चिंता
हालांकि, कंपनी की बढ़ती Capex योजनाओं के कारण कर्ज का बोझ बढ़ सकता है (डेट-टू-इक्विटी रेशियो 1.37 है)। मैनेजमेंट ने यह भी संकेत दिया है कि बढ़ते Capex कमिटमेंट्स के चलते डिविडेंड भुगतान में देरी हो सकती है, जो आय-केंद्रित निवेशकों को प्रभावित कर सकता है। डिविडेंड पेआउट रेशियो FY22-24 के 68.3% से घटकर FY25 में 62.9% हो गया है, और भविष्य में यह 53-54% के आसपास रहने का अनुमान है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, रेगुलेटेड यूटिलिटी के लिए 17-19 का P/E रेशियो काफी ज्यादा लगता है।
एनालिस्ट्स की राय
एनालिस्ट्स आम तौर पर पॉजिटिव आउटलुक दे रहे हैं। एलारा सिक्योरिटीज (Elara Securities) ने 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹360 दिया है, जबकि एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग (Antique Stock Broking) ने सुधारित एग्जीक्यूशन और पाइपलाइन विजिबिलिटी को देखते हुए टारगेट प्राइस ₹326 तक बढ़ाया है। कंसेंसस टारगेट प्राइस लगभग ₹338 है, जो मौजूदा स्तरों से लगभग 12% के अपसाइड की ओर इशारा करता है।