यूनियन बजट 2026 के तुरंत बाद, फर्स्ट फरवरी को शेयर बाज़ार में बड़ी उथल-पुथल देखी गई। Sensex और Nifty में अचानक भारी गिरावट आई। इस गिरावट की मुख्य वजह फ्यूचर्स (Futures) पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% और ऑप्शंस (Options) पर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% करना रहा। इस कदम से ट्रेडिंग की लागत बढ़ गई और बाज़ार का सेंटिमेंट (Sentiment) थोड़ा कमजोर हुआ।
इसके अलावा, FY27 के लिए सरकार द्वारा ₹17.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड लोन (Borrowing) लेने का अनुमान भी बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) को लेकर चिंताएं बढ़ा रहा है, जिसका सीधा असर फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन्स पर पड़ सकता है। पब्लिक सेक्टर बैंक (PSU Banks) में अचानक बिकवाली देखी गई, वहीं BSE जैसे एक्सचेंज ऑपरेटर्स के स्टॉक्स पर भी दबाव देखा गया क्योंकि STT में बढ़ोत्तरी से ट्रेडिंग वॉल्यूम्स (Trading Volumes) कम होने की आशंका है।
दूसरी ओर, Chola Securities के Dharmesh Kant जैसे एनालिस्ट्स डिफेंस सेक्टर पर पॉजिटिव बने हुए हैं। उनका मानना है कि इस सेक्टर के पास मजबूत ऑर्डर विज़िबिलिटी (Order Visibility) है और सरकार का इस पर लगातार फोकस बना रहेगा। प्रमुख डिफेंस कंपनियों के पास ₹3 लाख करोड़ से अधिक के ऑर्डर बुक हैं। Hindustan Aeronautics (HAL) जैसी कंपनियों के पास ₹1.8 से ₹2.3 लाख करोड़ का बड़ा ऑर्डर बैकलॉग (Order Backlog) है। उम्मीद है कि अगले दो से तीन सालों में इस सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) सालाना 18–20% की दर से बढ़ सकती है।
रेलवे सेक्टर भी ग्रोथ के लिए एक अहम क्षेत्र माना जा रहा है, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में बढ़ोत्तरी का ज़िक्र है। यूनियन बजट 2026 में इंडियन रेलवेज़ के लिए रिकॉर्ड ₹2.93 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है, जो पिछले साल से 8% ज़्यादा है। यह रेलवे के आधुनिकीकरण (Modernisation) और विस्तार (Expansion) की ओर एक मज़बूत इशारा है। रेलवे कंस्ट्रक्शन की प्रमुख कंपनी IRCON International के पास सितंबर 2025 तक लगभग ₹23,865 करोड़ का बड़ा ऑर्डर बुक है। ₹150-₹153 के भाव पर ट्रेड कर रही IRCON का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब ₹15,415 करोड़ है।
डेटा सेंटर इंडस्ट्री (Data Center Industry) में लंबे समय की अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं, खासकर विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स इंसेंटिव्स (Tax Incentives) के चलते। Netweb Technologies और Aurionpro Solutions जैसी कंपनियां इससे फायदा उठा सकती हैं। वहीं, फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन्स के लिए नज़दीकी भविष्य में थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह है। बढ़ती बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) ट्रेजरी इनकम (Treasury Income) को प्रभावित कर सकती हैं, जो बैंकों के प्रॉफिट का एक बड़ा हिस्सा होती है। पब्लिक सेक्टर बैंक (PSU Banks) में आई गिरावट को लंबी अवधि के लिए खरीदारी के मौके के तौर पर देखा जा रहा है।