नतीजे: रेवेन्यू चमका, पर मुनाफे में फंसे पेंच
कंपनी के नतीजों को अगर बारीकी से देखें, तो Q3 FY26 में Pitti Engineering की कुल इनकम साल-दर-साल (YoY) 15% बढ़कर ₹484.3 करोड़ रही। वहीं, एडजस्टेड EBITDA में 25% का जोरदार उछाल आया और यह ₹83 करोड़ पर पहुंच गया। इससे EBITDA मार्जिन 1.4 प्रतिशत अंक (pp) बढ़कर 17.5% हो गया। यह अच्छी ग्रोथ नौ महीने (9MFY26) के दौरान भी जारी रही, जहां आय 14% बढ़कर ₹1,447.3 करोड़ और एडजस्टेड EBITDA 27% बढ़कर ₹242 करोड़ रहा, मार्जिन 17.1% पर थे।
मगर, जब हम प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) की बात करते हैं, तो तस्वीर थोड़ी बदल जाती है। Q3 FY26 में एडजस्टेड PAT में YoY आधार पर केवल 4% की मामूली वृद्धि हुई और यह ₹30 करोड़ रहा। नतीजतन, एडजस्टेड PAT मार्जिन घटकर 6.3% रह गए। 9MFY26 में भी एडजस्टेड PAT 13% बढ़कर ₹97 करोड़ हुआ, लेकिन PAT मार्जिन 6.9% तक सिकुड़ गए। ग्रॉस मार्जिन भी थोड़े कम हुए, जो Q3 FY26 में 40.0% और 9MFY26 में 39.5% दर्ज किए गए। यह इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी या प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव का संकेत दे सकता है।
कैश फ्लो पर चिंता और बड़े Capex की योजना
ऑपरेटिंग कैश फ्लो की बात करें तो 9MFY26 में कंपनी ने ₹95.4 करोड़ कमाए। लेकिन, कंपनी की निवेश गतिविधियों (investing activities) में ₹93.8 करोड़ खर्च हो गए, जिसके बाद इस अवधि में फ्री कैश फ्लो (FCF) मात्र ₹1.6 करोड़ ही बच पाया। यह बहुत ही पतला FCF जनरेशन चिंता का विषय है, खासकर जब कंपनी बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) की योजना बना रही है।
Pitti Engineering अगले 18 महीनों में ₹150 करोड़ का Capex करने की तैयारी में है। इस योजना के तहत, FY27 तक शीट मेटल कैपेसिटी को 20% (1,08,000 MT तक) और कास्टिंग कैपेसिटी को 32% (24,600 MT तक) बढ़ाने का लक्ष्य है। ऐसे में, कम FCF के साथ बड़े निवेश पर कंपनी कैसे रिटर्न कमाएगी, यह देखना अहम होगा।
मैनेजमेंट की चुप्पी और आगे की राह
निवेशकों के लिए एक और चिंता का विषय यह है कि कंपनी ने आने वाली तिमाहियों के लिए कोई स्पष्ट वित्तीय गाइडेंस या एनालिस्ट EPS अनुमान जारी नहीं किए हैं। कंपनी की मैनेजमेंट ने इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग, R&D, कस्टमर फोकस और एक्सपोर्ट में बढ़ती पैठ को अपनी ताकत बताया है, लेकिन मार्जिन दबाव और FCF को बेहतर बनाने की ठोस रणनीति का खुलासा नहीं किया है।
मुख्य जोखिम यह है कि टॉप-लाइन ग्रोथ और EBITDA में बढ़ोतरी के बावजूद PAT और ग्रॉस मार्जिन पर लगातार दबाव बना हुआ है। इसके पीछे कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, परिचालन खर्च में इजाफा या कम मार्जिन वाले उत्पादों का अधिक बिकना जैसे कारण हो सकते हैं। इसके अलावा, ₹150 करोड़ के प्रस्तावित Capex को देखते हुए, कंपनी की कर्ज-इक्विटी अनुपात (Debt-to-Equity ratio) फिलहाल 0.8x पर स्थिर है, लेकिन भविष्य में यह बढ़ सकता है। हालांकि, कंपनी की विविध इंडस्ट्रीज (जैसे रेलवे, पावर, माइनिंग) और मजबूत एक्सपोर्ट (9MFY26 राजस्व का 28%) एक बेहतर ग्रोथ बेस प्रदान करते हैं। लेकिन, विकास और लाभप्रदता की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी लागत दबावों से कैसे निपटती है और अपनी बढ़ी हुई क्षमता का कितना प्रभावी ढंग से लाभ उठा पाती है।
