कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के ₹32.80 करोड़ से बढ़कर ₹71.49 करोड़ हो गया। यह ज़बरदस्त उछाल मुख्य रूप से कंपनी के कंसोलिडेटेड खर्चों में कमी की वजह से आया है, जो ₹1,498.3 करोड़ से घटकर ₹1,311.3 करोड़ हो गए।
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए, पटेल इंजीनियरिंग का नेट प्रॉफिट 21.60% बढ़कर ₹294.50 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹242.17 करोड़ था। वहीं, साल भर में कुल आय मामूली बढ़कर ₹5,268.5 करोड़ से ₹5,259.6 करोड़ हो गई।
वित्तीय सेहत में ज़बरदस्त सुधार
कंपनी की वित्तीय सेहत में ज़बरदस्त सुधार हुआ है। मैनेजिंग डायरेक्टर कविता शिरवाइकर ने कुशल एग्जीक्यूशन (execution) पर ज़ोर दिया। कंपनी पर कुल कर्ज, उसकी अपनी नेटवर्थ (Net Worth) की तुलना में काफी कम हो गया है। यह अनुपात अब 0.27x है, जो पिछले साल 0.43x था। यह कंपनी की बढ़ती वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है।
मजबूत ऑर्डर बुक से भविष्य को गति
सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर ज़ोर दिए जाने का कंपनी को ज़बरदस्त फायदा मिलने की उम्मीद है। पटेल इंजीनियरिंग को हाइड्रोपावर, टनलिंग, सिंचाई, ट्रांसपोर्टेशन और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में शानदार अवसर मिल रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी को लगभग ₹4,400 करोड़ के नए प्रोजेक्ट ऑर्डर मिले हैं। इसके अलावा, कंपनी ₹1,660 करोड़ के प्रोजेक्ट्स के लिए लोएस्ट बिडर (L1) भी रही है। ₹1,700 करोड़ की 144-मेगावाट गोंगरी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए एक एमओयू (MOU) भी साइन किया गया है। कुल मिलाकर, कंपनी के पास ₹6,000 करोड़ से ज़्यादा के प्रोजेक्ट्स की पाइपलाइन तैयार है।
पटेल इंजीनियरिंग, एनएचपीसी (NHPC) के 2000-मेगावाट सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में एक प्रमुख प्लेयर बनी हुई है। कंपनी नेपाल और भूटान में भी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में योगदान दे रही है, जो उसके क्षेत्रीय विस्तार को दर्शाता है।