Pace Digitek Ltd. ने Damodar Valley Corporation (DVC) के साथ ₹702 करोड़ का एक बड़ा सौदा पक्का किया है। इसके तहत कंपनी मैथन, झारखंड में 250 MW/500 MWh का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट स्थापित करेगी, जिसमें 12 साल का मेंटेनेंस (O&M) भी शामिल है। प्रोजेक्ट के सप्लाई और EPC फेज में 18 महीने लगने की उम्मीद है। यह फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए कंपनी का पहला BESS ऑर्डर है।
यह जीत भारत के तेजी से बढ़ते एनर्जी स्टोरेज मार्केट में Pace Digitek की स्थिति को मजबूत करती है। इस मार्केट के 2026 में 2.05 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2031 तक 8.59 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जिसमें 33.2% की सालाना ग्रोथ देखी जा सकती है। हालांकि, इस सेक्टर में Tata Power, Adani Energy Solutions और Reliance New Energy जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं, जो अक्सर आक्रामक बिडिंग करते हैं।
लेकिन, इस बड़ी जीत के बावजूद, Pace Digitek गंभीर कैश फ्लो (cash flow) की समस्या से जूझ रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनी के Accounts Receivable ₹17,615 मिलियन तक पहुंच गए, जो एक बड़ी संपत्ति का हिस्सा है। इस साल Receivables में ₹7,830 मिलियन की बढ़ोतरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। इसके परिणामस्वरूप ₹1,759 मिलियन का नेगेटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो और ₹2,124 मिलियन का फ्री कैश फ्लो दर्ज किया गया। यह लाभ को नकदी में बदलने की कंपनी की कमजोरी को दर्शाता है।
इन वित्तीय चिंताओं के बीच, एनर्जी डिविजन में लीडरशिप में बदलाव ने निवेशकों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। बिजनेस हेड – एनर्जी, सुनील जयम ने 30 मई, 2026 को पर्सनल कारणों से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले हेड – ICT – टेक्निकल एंड ऑपरेशंस, सथ्या सीलन टी ने भी इस्तीफा दिया था। इन इस्तीफों ने तेजी से बढ़ रहे इस डिविजन में लीडरशिप की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं।
ऐतिहासिक रूप से, कंपनी को बड़े ऑर्डर मिलने पर भी उसके शेयर की कीमत पर कोई खास असर नहीं देखा गया है। उदाहरण के लिए, मार्च 2026 में NTPC का ₹494.54 करोड़ का ऑर्डर मिलने के बाद शेयर में मामूली उछाल आया था। यह निवेशकों के कंपनी की एग्जीक्यूशन क्षमता और लाभप्रदता पर संदेह को दर्शाता है। Pace Digitek की भविष्य की सफलता काफी हद तक उसकी वर्किंग कैपिटल एफिशिएंसी और बड़े प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
