Pace Digitek की ग्रोथ का बूस्टर डोज
Pace Digitek नए वित्तीय वर्ष 2026 के लिए ₹6,459.7 करोड़ के मजबूत ऑर्डर बुक के साथ तेजी के दौर में है। इस उपलब्धि में एनर्जी सेक्टर का दबदबा रहा, जिसने इन नए ऑर्डरों का लगभग 90% यानी ₹5,814.7 करोड़ जुटाए। खास बात यह है कि कंपनी ने ₹2,455 करोड़ के बड़े Build-Own-Operate (BOO) कॉन्ट्रैक्ट्स भी हासिल किए हैं। ये BOO डील लंबी अवधि में लगातार कमाई का जरिया बनती हैं, जो Pace Digitek को सिर्फ इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) पर निर्भर कंपनियों से अलग करती हैं। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, वेणुगोपाल राव मद्दीसेट्टी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 एनर्जी ऑपरेशंस, खासकर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में विस्तार के लिए अहम साल होगा।
एनर्जी की धाक और एन्युटी पर फोकस
एनर्जी डिवीजन ने ₹5,814.7 करोड़ के ऑर्डर लाकर दम दिखाया। जहां EPC कॉन्ट्रैक्ट्स ₹3,048.4 करोड़ के हैं, वहीं ₹2,455 करोड़ के BOO कॉन्ट्रैक्ट्स कंपनी की स्ट्रेटेजी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन BOO प्रोजेक्ट्स से स्थिर और लंबी अवधि का कैश फ्लो मिलने की उम्मीद है, जिससे बिजनेस की अस्थिरता कम होगी। एन्युटी इनकम की ओर यह झुकाव कंपनी की एक बड़ी ताकत है। Pace Digitek का मार्केट वैल्यू करीब ₹3,600-₹3,700 करोड़ है, और इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो 12-14.5x के बीच है। यह इंडस्ट्री के औसत P/E 17x से थोड़ा कम है, जो BOO रेवेन्यू के बढ़ने पर ग्रोथ की अच्छी संभावना दिखाता है।
टेलीकॉम सेक्टर का साथ
टेलीकॉम सेक्टर ने ₹645 करोड़ के ऑर्डर जोड़कर एक स्थिर सहारा दिया है। BSNL, Tata Teleservices, RailTel और Indian Railways जैसे प्रमुख ग्राहकों से मिले ऑर्डर ऑपरेशंस, मेंटेनेंस, इक्विपमेंट सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हैं। ये प्रोजेक्ट्स रेगुलर रेवेन्यू और अनुमानित कैश फ्लो सुनिश्चित करते हैं, जो एनर्जी बिजनेस की ग्रोथ के लिए एक मजबूत आधार तैयार करते हैं।
मार्केट परफॉर्मेंस और आगे की राह
इस बड़ी खबर के बाद, Pace Digitek के शेयर में करीब 2.77% की तेजी आई और यह ₹172.50 पर पहुंच गया। यह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर भारतीय बाजार में आई गिरावट से बेहतर प्रदर्शन था, जहां निफ्टी 50 0.36% फिसला। कंपनी का शेयर पिछले एक साल में 27% से ज्यादा गिर चुका है। यह दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए कंपनी को लगातार बेहतर परफॉरमेंस और मुनाफे पर ध्यान देना होगा।
सरकारी सहारा और सेक्टर की चुनौतियां
भारत सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च कर रही है, जो Pace Digitek जैसी कंपनियों के लिए एक अच्छा माहौल बनाता है। 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य भी एनर्जी ट्रांजिशन में लगी कंपनियों के लिए फायदेमंद है। वहीं, कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और ट्रांसमिशन की दिक्कतें, जिन पर सरकार काम कर रही है। साथ ही, SECI द्वारा दिए गए बड़े रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के खरीदार अभी नहीं मिल पाए हैं, जो ऊर्जा की मांग पर असर डाल सकता है।
एग्जीक्यूशन और क्लाइंट रिस्क
बड़े ऑर्डर बुक का फायदा तभी है जब उनका सफल एग्जीक्यूशन हो। EPC कॉन्ट्रैक्ट्स में लागत बढ़ने और देरी से बचने के लिए कुशल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जरूरी है। NTPC, SECI और KPTCL जैसे बड़े क्लाइंट्स पर निर्भरता भी एक रिस्क है, अगर सरकारी खर्च में कमी आती है या नीतियां बदलती हैं। ऐसे में भविष्य के ऑर्डर पर असर पड़ सकता है। यह सेक्टर बहुत कॉम्पिटिटिव भी है, जहां बड़ी कंपनियां ज्यादा बड़े प्रोजेक्ट्स को संभाल सकती हैं।