सरकारी कंपनियों द्वारा यह कैपेक्स (Capex) का बढ़ा हुआ प्लान भारत की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं और प्रमुख इंडस्ट्रीज से उम्मीद की जा रही रिकवरी का फायदा उठाने के लिए किया जा रहा है। हाल ही में मेटल्स स्टॉक्स में कुछ गिरावट दिखी हो, लेकिन सरकारी खर्च और नीतियों के सपोर्ट से इस सेक्टर का भविष्य मजबूत नजर आ रहा है।
PSU Expansion Drive
बजट के आंकड़ों के अनुसार, स्टील PSUs ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए कुल ₹25,125 करोड़ के कैपेक्स का लक्ष्य रखा है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में 43.9% ज्यादा है। इसमें सबसे आगे Steel Authority of India Limited (SAIL) है, जिसने FY27 के लिए ₹15,000 करोड़ का कैपेक्स अनुमान लगाया है, जबकि FY26 में यह ₹10,000 करोड़ था। National Mineral Development Corporation (NMDC) भी पीछे नहीं है, वह FY26 के ₹6,000 करोड़ से बढ़ाकर FY27 में ₹9,000 करोड़ खर्च करने की योजना बना रहा है। Manganese Ore India Limited (MOIL) भी अपने कैपेक्स को ₹600 करोड़ से बढ़ाकर ₹800 करोड़ करने वाला है। इन बड़े निवेशों का मुख्य जरिया इंटरनल और एक्स्ट्रा बजटरी रिसोर्सेज (IEBR) यानी कंपनी की अपनी कमाई और फंड्स हैं।
Market Context and Performance
हालांकि, कैपेक्स के इस मजबूत आउटलुक के बावजूद, हाल ही में मार्केट में गिरावट देखी गई। 30 जनवरी 2026 को Nifty Metal इंडेक्स में पिछले नौ महीनों की सबसे बड़ी इंट्रा-डे गिरावट आई, जो करीब 5% तक गिर गया। इस दौरान SAIL और NMDC के शेयर करीब 4% गिरे, जबकि Tata Steel करीब 5% और JSW Steel 2% फिसले। फिलहाल, ₹149 पर ट्रेड कर रहे SAIL का P/E रेश्यो 24.11 और मार्केट कैप ₹61,400 करोड़ है। वहीं, ₹81.76 के भाव पर NMDC का मार्केट कैप ₹70,669 करोड़ और P/E रेश्यो 10.06 है। यह दिखाता है कि अल्पावधि (short-term) में मुनाफावसूली (profit-booking) का ट्रेंड इन कंपनियों के मीडियम-टर्म ग्रोथ प्लान्स पर हावी हो गया है।
Sector Outlook and Growth Drivers
भारत, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है, 2030-31 तक अपनी क्षमता को 300 मिलियन टन प्रति वर्ष (mtpa) तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि घरेलू स्टील सेक्टर में ग्रोथ की उम्मीद है, जो ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद घरेलू कीमतों में सुधार से प्रेरित होगी। Nomura की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्टील कंजम्पशन में हालिया कमजोरी मौसमी (seasonal) हो सकती है और फाइनेंशियल ईयर 2027-28 में ग्रोथ के फिर से रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। यह रिकवरी ऑटोमोटिव सेक्टर में सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और अन्य इंडस्ट्रीज से आएगी। बजट 2026 में सरकार द्वारा ₹12.2 लाख करोड़ का पब्लिक कैपेक्स आवंटन सीधे स्टील की मांग को बढ़ाएगा, खासकर टियर II और टियर III शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और नए फ्रेट कॉरिडोर्स के लिए।
The Green Steel Transition
इसके साथ ही, लो-एमिशन ग्रीन स्टील (green steel) की ओर एक बड़ा स्ट्रैटेजिक बदलाव भी हो रहा है। ICRA रेटिंग्स का अनुमान है कि FY2040 तक ग्रीन स्टील भारत की कुल स्टील डिमांड का लगभग 10% हिस्सा हो सकता है, जबकि FY2030 में यह अनुमानित 2% था। हालांकि, यह बदलाव धीरे-धीरे होने की उम्मीद है। मौजूदा स्टील प्रोडक्शन की इंटेंसिटी ग्लोबल एवरेज से ज्यादा है, और कॉस्ट व टेक्नोलॉजिकल चुनौतियां, खासकर ग्रीन हाइड्रोजन की हाई कॉस्ट, तेजी से डीकार्बोनाइजेशन (decarbonisation) के रास्ते में बाधाएं खड़ी कर रही हैं। माना जा रहा है कि ऑपरेश्नल एफिशिएंसी और रिन्यूएबल एनर्जी को अपनाने से FY2030 तक एमिशन लगभग 19% कम हो सकते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर ग्रीन स्टील कैपेसिटी बढ़ाना एक लंबी अवधि का लक्ष्य है, जो आर्थिक व्यवहार्यता और टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट पर निर्भर करेगा।