ऑर्डर बुक में आया बड़ा बदलाव
PNC Infratech को पंतनगर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा बिडर (Lowest Bidder) चुना गया है। यह कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए एक बड़ी जीत है और यह दिखाता है कि कंपनी सिर्फ रोड कंस्ट्रक्शन तक सीमित नहीं रहना चाहती। फिलहाल, कंपनी के कुल ऑर्डर बुक में रोड्स का हिस्सा लगभग 63% है, लेकिन PNC Infratech अब माइनिंग, पानी और एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रही है। एनालिस्ट्स का मानना है कि यह नई दिशा कंपनी के लिए काफी जरूरी है, खासकर तब जब फाइनेंशियल ईयर 26 में रेवेन्यू में गिरावट देखी गई थी।
वित्तीय स्थिति और कैश फ्लो
प्रोजेक्ट जीतने के अलावा, कंपनी अपनी बैलेंस शीट को भी मजबूत कर रही है। हाल ही में, 'विवाद से विश्वास III' स्कीम के तहत नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से ₹234.99 करोड़ का सेटलमेंट मिलने के बाद PNC Infratech की लिक्विडिटी (Liquidity) में काफी सुधार हुआ है। इस पैसे से वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी होंगी, जो पहले पेमेंट में देरी और प्रोजेक्ट शुरू होने में हो रही देरी के कारण थोड़ी मुश्किल में थीं। फाइनेंशियल ईयर 26 में कंपनी का ग्रॉस डेट टू इक्विटी रेशियो घटकर 0.8x हो गया है, जो पिछले साल 1.6x था। यह कंपनी के कर्ज कम करने के प्रयासों को दिखाता है।
क्यों है निवेशकों में चिंता?
ऑर्डर बुक में विविधता और कर्ज में कमी के बावजूद, PNC Infratech के स्टॉक में पिछले दो सालों से दबाव देखा जा रहा है। ब्रोकरेज फर्म्स 'बाय' रेटिंग दे रही हैं, लेकिन बड़े निवेशक अभी भी सतर्क हैं। चिंताएं यह हैं कि क्या कंपनी अपने मिले हुए प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कर पाएगी और क्या यह रेवेन्यू ग्रोथ में तब्दील होगा। कई प्रोजेक्ट्स की 'अपॉइंटेड डेट' (Appointed Date) में देरी हो रही है। इसके अलावा, EPC सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी एक चुनौती है, जहां छोटी कंपनियां बड़े खिलाड़ियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। हाल ही में कंपनी में इंटरनल ऑडिट और फाइनेंसियल ओवरसाइट रोल्स में हुए बदलावों पर भी बारीकी से नजर रखी जा रही है।
भविष्य की राह
मार्केट उम्मीद कर रहा है कि फाइनेंशियल ईयर 27 के दूसरे हाफ तक कंपनी की एग्जीक्यूशन क्षमता (Execution Capacity) सामान्य हो जाएगी। ₹18,000 करोड़ से ज्यादा के एग्जीक्यूटेबल ऑर्डर बुक के साथ, कंपनी के पास रेवेन्यू की अच्छी विजिबिलिटी है। लेकिन, इस क्षमता को हकीकत में बदलने के लिए कंपनी को मिले हुए प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करना होगा और साथ ही इनपुट कॉस्ट (Input Cost) को कंट्रोल में रखना होगा।
