मुनाफे में भारी गिरावट, मार्जिन पर बड़ा दबाव
PNC Infratech के तीसरी तिमाही के नतीजों से साफ है कि कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर बुरा असर पड़ा है। स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 12.3% घटकर ₹1056 करोड़ पर पहुंच गया। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू भी 18.3% लुढ़ककर ₹1201 करोड़ रहा।
सबसे बड़ी चिंता कंसोलिडेटेड एबिटडा (EBITDA) में 37.0% साल-दर-साल (YoY) की भारी गिरावट की है, जो सिर्फ ₹239 करोड़ रहा। अगर पिछले नौ महीनों (9M FY26) की बात करें, तो कंसोलिडेटेड एबिटडा में 49.5% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो ₹860 करोड़ रहा। मार्जिन भी काफी सिकुड़कर 22.9% पर आ गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 33.6% था।
'वन-ऑफ' आय ने नतीजों को संभाला
हालांकि, नतीजों में एक बड़ी बात यह है कि रिपोर्ट किए गए आंकड़े असली तस्वीर नहीं दिखाते। कंपनी को 'वन-ऑफ' (One-off) आय का बड़ा सहारा मिला है। स्टैंडअलोन 9M FY26 एबिटडा में ₹435 करोड़ का बोनस और आर्बिट्रेशन अवार्ड्स (Arbitration Awards) शामिल हैं, जबकि रिपोर्टेड एबिटडा ₹408 करोड़ था।
इसी तरह, कंसोलिडेटेड 9M FY26 एबिटडा ₹860 करोड़ में से ₹572 करोड़ इन्हीं अवार्ड्स से आए हैं। इतना ही नहीं, कंसोलिडेटेड पीएटी (PAT) यानी टैक्स के बाद का मुनाफा ₹724 करोड़ में ₹430 करोड़ की भारी-भरकम एसेट मोनेटाइजेशन (Asset Monetization) यानी संपत्ति बेचने से हुई आय शामिल है।
भविष्य की चिंताएं और आउटलुक
लगातार आर्बिट्रेशन अवार्ड्स और संपत्ति बेचकर मुनाफे को बढ़ाने की यह निर्भरता, कंपनी की अंदरूनी ऑपरेशनल चुनौतियों और मुनाफे की स्थिरता पर सवाल उठाती है। निवेशकों को PNC Infratech पर बारीकी से नजर रखनी होगी कि क्या कंपनी अपने मुख्य प्रोजेक्ट्स को कुशलता से पूरा कर पाती है और मार्जिन में सुधार ला पाती है। 'वन-ऑफ' आय को दोहराया नहीं जा सकता, इसलिए नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत और उनके एग्जीक्यूशन (Execution) की क्षमता भविष्य में कंपनी के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।