नतीजों पर एक नज़र
कंपनी के कंसोलिडेटेड नतीजों के अनुसार, Q3 FY26 में कुल इनकम 43.2% की जोरदार बढ़ोतरी के साथ ₹48.89 करोड़ रही, जबकि पिछले साल यह ₹34.14 करोड़ थी। इस ज़बरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ का मुख्य कारण ₹124.17 करोड़ के नए ऑर्डर्स रहे, जिसने कंपनी की ऑर्डर बुक को मजबूत किया।
हालांकि, मुनाफे (Profit) की बात करें तो नेट प्रॉफिट (Net Profit) 11.9% बढ़कर ₹3.57 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹3.19 करोड़ था। लेकिन, रेवेन्यू की तुलना में प्रॉफिट की ग्रोथ धीमी रहने के चलते नेट प्रॉफिट मार्जिन (NPM) में गिरावट आई, जो 9.35% से घटकर 7.31% रह गया। इसी तरह, अर्निंग्स पर शेयर (EPS) में भी 12.9% की कमी आई और यह ₹1.69 दर्ज हुआ।
पूरे नौ महीनों (9M FY26) की बात करें तो कंसोलिडेटेड आय 39.7% बढ़कर ₹161.35 करोड़ हुई, वहीं नेट प्रॉफिट 21.9% बढ़कर ₹10.91 करोड़ रहा। लेकिन, इस अवधि के लिए भी NPM घटकर 6.76% हो गया, जो पिछले साल 7.72% था।
प्रमुख ऑर्डर्स और नए उत्पाद
रेवेन्यू ग्रोथ में Ajmer Vidyut Vitran Nigam Limited से ₹102.78 करोड़ और ATS Techno Limited से ₹21.39 करोड़ के बड़े ऑर्डर्स का बड़ा योगदान रहा। कंपनी की सब्सिडियरी ने 11 kV segregated phase busduct system के लिए अप्रूवल के बाद 'Phibar' ब्रांड नाम से नया बसडक्ट सिस्टम भी लॉन्च किया है। माना जा रहा है कि यह नया उत्पाद कंपनी की तकनीकी क्षमता और बाज़ार में उपस्थिति को और मज़बूत करेगा।
निवेशकों की चिंताएं: कर्ज़ और मार्जिन
बाज़ार की नज़रों में सबसे बड़ी चिंता घटते मार्जिन की है। यह बढ़ती लागत, कामकाज में इनएफिशिएंसी या कॉम्पिटिशन का नतीजा हो सकता है। इसके अलावा, कंपनी के स्टैंडअलोन (Standalone) फाइनेंशियल्स में डेट टू इक्विटी रेश्यो (Debt to Equity Ratio) FY24 के 0.28 से बढ़कर FY25 में 0.50 हो गया है। साथ ही, इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (Interest Coverage Ratio) भी 18.44 से गिरकर 15.01 पर आ गया है। हालांकि अभी स्थिति गंभीर नहीं है, पर बढ़ता कर्ज़ और घटता कवरेज निवेशकों को सावधानी बरतने का संकेत दे रहे हैं।
रिस्क और भविष्य का आउटलुक
कंपनी को लगातार मार्जिन पर दबाव झेलना पड़ रहा है, जो कि एक प्रमुख रिस्क है। इसके अलावा, स्टैंडअलोन डेट में वृद्धि और इंटरेस्ट कवरेज में कमी पर बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत है। बड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर और मुनाफे में पूरा करना भी एक चुनौती रहेगी।
मैनेजमेंट कंपनी के ग्रोथ की राह पर कॉन्फिडेंट है, पर भविष्य को लेकर कोई खास टार्गेट नहीं बताए गए हैं। अगर बात करें पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन EPC सेक्टर की, तो Kalpataru Projects International और KEC International जैसी कंपनियां भी इसी तरह के रेवेन्यू ग्रोथ और मार्जिन प्रेशर से गुजर रही हैं। PIGL का 'Phibar' बसडक्ट सिस्टम इसे अपने प्रतिस्पर्धियों से अलग पहचान दिलाने में मददगार हो सकता है।