PFC REC Deal: मर्जर की ओर बढ़ीं दोनों PSU! बजट के बाद CCEA की 'इन-प्रिंसिपल' मंजूरी
सरकारी गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है। पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PFC) ने रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (REC) में अपनी 52.63% हिस्सेदारी खरीद ली है। इस बड़ी डील के बाद REC अब PFC की सब्सिडियरी (सहायक कंपनी) बन गई है, और PFC नई होल्डिंग कंपनी के तौर पर काम करेगी।
यह कदम पब्लिक सेक्टर NBFCs में कंसॉलिडेशन (विलय) को बढ़ावा देने की सरकार की मंशा को दर्शाता है, जिसका ज़िक्र यूनियन बजट 2026 में भी किया गया था। कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने दोनों कंपनियों के प्रस्तावित विलय को 'इन-प्रिंसिपल' (सैद्धांतिक) मंजूरी दे दी है।
विलय की राह में पुरानी बाधाएं और आगे का रास्ता
इस कंसॉलिडेशन का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी मजबूत वित्तीय संस्था तैयार करना है जो बड़े क्रेडिट डिस्बर्सल (ऋण वितरण) और टेक्नोलॉजी अडॉप्शन (तकनीकी अंगीकरण) में बेहतर प्रदर्शन कर सके। हालांकि, मर्जर की राह में सबसे बड़ी चुनौती भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक्सपोजर लिमिट्स (जो किसी NBFC की कैपिटल बेस के 25% तक सिंगल-प्रोजेक्ट एक्सपोजर को सीमित करती हैं) हैं।
अलग-अलग एंटिटीज के तौर पर, PFC और REC संयुक्त रूप से फाइनेंस किए गए प्रोजेक्ट्स में कुल 50% तक की हिस्सेदारी रख सकती थीं। लेकिन, एक संयुक्त एंटिटी बनने पर, यह सीमा कई मौजूदा लोन के लिए पार हो सकती है। ऐसे में, उन्हें कॉस्टली डी-लिवरेजिंग (महंगी ऋण वसूली) या डिवेस्टमेंट्स (संपत्तियां बेचना) जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं। इससे पहले 2019-20 में भी PFC द्वारा REC की 52.63% हिस्सेदारी ₹14,500 करोड़ में अधिग्रहण करने के बाद मर्जर की कोशिश हुई थी, लेकिन यह रेगुलेटरी चिंताओं के कारण अटक गई थी।
शेयर बाज़ार में मिला-जुला रिएक्शन
इस घोषणा के बाद शेयर बाज़ार में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर Power Finance Corporation Ltd के शेयर 1.01% चढ़कर ₹419.20 पर बंद हुए, जिसमें ₹1.85 करोड़ की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, REC Limited के शेयरों में 2.51% की गिरावट आई और वे ₹372.50 पर बंद हुए, जिसमें ₹9.60 की कमी आई। निवेशक इन एंटिटीज के लंबी अवधि के रणनीतिक फायदों और तत्काल रेगुलेटरी व इंटीग्रेशन (एकीकरण) की चुनौतियों का आकलन कर रहे हैं।
आगे की राह
अब मर्जर की विस्तृत स्कीम को विभिन्न नियामक और कानूनी मंजूरियां मिलनी बाकी हैं। मर्जर के बाद बनी नई एंटिटी 'कंपनीज एक्ट, 2013' के तहत एक 'गवर्नमेंट कंपनी' के तौर पर काम करना जारी रखेगी। शेयरधारक इस बात पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि PFC और REC किस तरह रेगुलेटरी बाधाओं को पार कर इस कंसॉलिडेशन को सफलतापूर्वक पूरा करते हैं।
