Ola Electric का बड़ा कदम: अब दूसरी कंपनियों को बेचेंगे बैट्री, भारत को बनाएंगे आत्मनिर्भर!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Ola Electric का बड़ा कदम: अब दूसरी कंपनियों को बेचेंगे बैट्री, भारत को बनाएंगे आत्मनिर्भर!
Overview

Ola Electric ने अब अपनी बैट्री मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं का विस्तार करने का ऐलान किया है। कंपनी अपनी कृष्णागिरी स्थित गीगाफैक्ट्री से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को लिथियम-आयन सेल और बैटरी पैक सप्लाई करेगी, ताकि भारत की इंपोर्ट पर निर्भरता कम हो सके।

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स्कूटर मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़कर विस्तार

Ola Electric अपनी सेल मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स का विस्तार कर रही है, जो कंपनी की स्ट्रैटेजी में एक बड़ा बदलाव है। कंपनी अपनी भविष्य की क्षमता का एक बड़ा हिस्सा थर्ड-पार्टी सेल्स के लिए समर्पित करने की योजना बना रही है, ताकि वह इलेक्ट्रिक स्कूटर मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़कर भारत के समग्र इलेक्ट्रिक व्हीकल और एनर्जी स्टोरेज मार्केट में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सके।

बैट्री सप्लाई पार्टनरशिप जारी

कंपनी पहले से ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ऑटोमेकर्स के साथ अपनी कृष्णागिरी गीगाफैक्ट्री से लिथियम-आयन सेल और बैटरी पैक की सप्लाई को लेकर एडवांस्ड टॉक्स (advanced talks) में है। यह उसके पिछले फोकस से एक बड़ा बदलाव है, जहां वह केवल अपने इलेक्ट्रिक स्कूटरों के लिए सप्लाई करती थी। Ola भारत की एकमात्र फंक्शनिंग गीगाफैक्ट्री का संचालन करती है, जिसकी इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 6 GWh है। इसकी सब्सिडियरी, Ola Cell Technologies, ने अपनी 4680-फॉर्मेट की भारत सेल को सफलतापूर्वक कमर्शियलाइज किया है, जो टेस्ला द्वारा भी इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी है। कंपनी की योजना जुलाई 2027 तक अपनी इंस्टॉल्ड कैपेसिटी को 12 GWh और फाइनेंशियल ईयर 2028 के अंत तक 20 GWh तक बढ़ाने की है। इस क्षमता का लगभग 6.5 GWh हिस्सा अन्य कार निर्माताओं को थर्ड-पार्टी सेल्स के लिए आरक्षित है।

भारत की इंपोर्ट निर्भरता और धीमी इंसेंटिव प्रगति

यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत बैटरी सेल के लिए भारी इंपोर्ट पर निर्भर है, जहां इंपोर्ट उसकी लगभग 100% जरूरतों को पूरा करता है। सरकार की एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का लक्ष्य डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को 50 GWh तक बढ़ाना है, लेकिन इसमें प्रगति धीमी रही है। अक्टूबर 2025 तक, लक्ष्य का केवल 1.4 GWh, यानी 2.8% ही कमीशन हुआ है, जो पूरी तरह से Ola Electric द्वारा किया गया है। स्कीम के तहत अभी तक कोई इंसेंटिव नहीं दिया गया है, जो महत्वपूर्ण इंप्लीमेंटेशन चैलेंजेस को दर्शाता है। डोमेस्टिक प्रोडक्शन की यह धीमी गति भारत की तेजी से बढ़ती ईवी बैट्री डिमांड के विपरीत है, जिसके 2032 तक बढ़कर लगभग 200 GWh होने का अनुमान है।

कंपीटिटिव लैंडस्केप और कैपेसिटी प्लान्स

Ola Electric के कृष्णागिरी प्लांट का लक्ष्य वर्तमान 6 GWh से क्षमता बढ़ाकर भविष्य में 100 GWh तक पहुंचाना है, जिसमें FY28 तक 20 GWh तक पहुंचने पर नियर-टर्म फोकस है। भारत में कुल घोषित कैपेसिटी लगभग 178 GWh है, लेकिन ऑपरेशनल तैयारी बहुत कम है। कंपीटिटर्स जैसे Exide Industries, Amara Raja Batteries, और Reliance New Energy भी डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, Reliance जामनगर में 10 GWh का प्लांट बना रही है। ग्लोबली, चीन 3 TWh से अधिक कैपेसिटी के साथ बैट्री सेल मैन्युफैक्चरिंग पर हावी है, जो इंटरनेशनल मार्केट का विशाल पैमाना दिखाता है।

फाइनेंशियल चुनौतियां और मार्केट कंसर्न्स

हालांकि, Ola Electric वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। एक प्राइवेट कंपनी के तौर पर, इसने लगभग $1 बिलियन जुटाए हैं, जिसमें हाल ही में जून 2024 में $12 मिलियन का वेंचर डेट शामिल है। इसका फाइनेंशियल परफॉर्मेंस चुनौतीपूर्ण रहा है, जिसने FY25 के लिए ₹22.8 अरब का नेट लॉस दर्ज किया है, जो पिछले साल की तुलना में 44% अधिक है। एनालिस्ट सेंटिमेंट सतर्क है, जिसमें Ola Electric Mobility के लिए रेटिंग आम तौर पर 'Sell' की ओर झुकी हुई है, जिसका कारण संभावित डाउनसाइड्स और धीमी रेवेन्यू ग्रोथ फोरकास्ट हैं। एक्सटर्नल फंडिंग पर निर्भरता और महत्वपूर्ण ऑपरेशनल लॉसेज इसके एक्सपैंशन प्लान की लॉन्ग-टर्म वायबिलिटी पर सवाल खड़े करते हैं।

मार्केट पोटेंशियल और सेल्फ-रिलायंस गोल

B2B बैट्री सप्लाई मार्केट में प्रवेश करके, Ola Electric भारत के तेजी से बढ़ते ईवी बैट्री सेक्टर में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल करने के लिए तैयार है। FY27 तक 54 GWh और FY30 तक 127 GWh से अधिक की अनुमानित डिमांड को देखते हुए, बाहरी ऑटोमेकर्स को सप्लाई करने से आने वाले वर्षों में ₹15,000 करोड़ और ₹20,000 करोड़ के बीच अनुमानित पर्याप्त रेवेन्यू स्ट्रीम उत्पन्न हो सकती है। यह स्ट्रैटेजी भारत की बैट्री इंपोर्ट लागत को काफी कम कर सकती है और आवश्यक ईवी कंपोनेंट्स में अधिक सेल्फ-सफिशिएंसी के राष्ट्र के लक्ष्य का समर्थन कर सकती है।

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