भारत की एनर्जी स्टार्टअप Offgrid Energy Labs ने यूके के Hook में अपना पहला इंटरनेशनल प्रोडक्शन प्लांट शुरू किया है। यह **10 MWh** का पायलट प्लांट उनकी खास ZincGel बैटरी टेक्नोलॉजी पर फोकस करेगा, जो लंबे समय तक एनर्जी स्टोर करने में सक्षम है।
यूके में नए प्लांट की शुरुआत
भारत की अग्रणी एनर्जी सॉल्यूशन कंपनी Offgrid Energy Labs ने यूनाइटेड किंगडम के Hook शहर में अपना पहला विदेशी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चालू कर दिया है। यह 10 MWh क्षमता का पायलट प्लांट, भारत में विकसित की गई खास ZincGel बैटरी टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस कदम से कंपनी का रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) से निकलकर बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
ZincGel टेक्नोलॉजी: एक सुरक्षित विकल्प
Offgrid Energy Labs की ZincGel टेक्नोलॉजी जिंक-ब्रोमाइन केमिस्ट्री का इस्तेमाल करती है। कंपनी इसे पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी का एक सुरक्षित विकल्प बता रही है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह नॉन-फ्लेमेबल (न आग पकड़ने वाली) है, जिससे लिथियम बैटरी में होने वाले थर्मल रनअवे (thermal runaway) जैसे खतरों का जोखिम कम हो जाता है। ये बैटरियां खासकर उन जगहों के लिए डिज़ाइन की गई हैं जहाँ लंबे समय तक एनर्जी स्टोर करने की ज़रूरत होती है, जैसे रिन्यूएबल एनर्जी ग्रिड, माइक्रो-ग्रिड और इंडस्ट्रियल पावर बैकअप। कंपनी का दावा है कि ये बैटरियां 20 साल तक चल सकती हैं और हर दिन 100% डिस्चार्ज होने पर भी इनकी परफॉरमेंस बनी रहती है।
भारत-यूके ट्रेड एग्रीमेंट का फायदा
यूके में इस प्लांट की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूके के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) जल्द ही लागू होने वाला है। कंपनी को उम्मीद है कि यह एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच प्रोफेशनल्स की आवाजाही और टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान को आसान बनाएगा। यूके में बेस बनाकर, Offgrid Energy Labs यूरोपीय देशों की एनर्जी डिमांड का फायदा उठाना चाहती है और साथ ही अपनी सप्लाई चेन को भी मजबूत करना चाहती है, जो अक्सर लिथियम पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहती है।
सप्लाई चेन और फाइनेंशियल सपोर्ट
कंपनी ने ब्रोमाइन सप्लाई के लिए Archean Chemical Industries के साथ एग्रीमेंट किया है। साथ ही, Ankur Capital जैसे निवेशकों का भी इसे फाइनेंशियल सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, 10 MWh का यह प्लांट अभी एक डेमो यूनिट है, लेकिन कंपनी के सामने यह चुनौती है कि वह यह साबित कर सके कि जिंक-आधारित स्टोरेज टेक्नोलॉजी, मार्केट में पहले से मौजूद लिथियम-आयन जैसी टेक्नोलॉजीज़ के मुकाबले लागत और एफिशिएंसी में टक्कर दे सकती है।
आगे क्या?
निवेशकों और इंडस्ट्री के लिए यह देखना अहम होगा कि Hook प्लांट कितना सफल होता है और कंपनी बड़े ऑर्डर हासिल कर पाती है या नहीं। रियल-वर्ल्ड ग्रिड एप्लीकेशन्स में ZincGel बैटरियों की परफॉरमेंस और CETA ट्रेड फ्रेमवर्क का सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स में कितना सहयोग मिलता है, यह सब महत्वपूर्ण होगा।
