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NowPurchase को मिले ₹80 Cr! मेटल टेक और रीसाइक्लिंग सेक्टर में क्रांति लाने की तैयारी

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AuthorMehul Desai|Published at:
NowPurchase को मिले ₹80 Cr! मेटल टेक और रीसाइक्लिंग सेक्टर में क्रांति लाने की तैयारी
Overview

Startup NowPurchase ने ₹80 करोड़ की एक बड़ी फंडिंग जुटाई है। इस राउंड का नेतृत्व Bajaj Finserv ने किया है, और मौजूदा निवेशकों InfoEdge Ventures और Orios Venture Partners ने भी इसमें भाग लिया। यह फंड कंपनी को अपनी मेटल प्रोक्योरमेंट टेक्नोलॉजी को और बेहतर बनाने और स्क्रैप रीसाइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद करेगा।

टेक्नोलॉजी और रीसाइक्लिंग को मिलेगी नई रफ़्तार

NowPurchase के लिए यह फंडिंग एक बड़ा बूस्ट साबित होगी। ₹80 करोड़ की इस पूंजी से कंपनी अपने टेक्नोलॉजी-ड्रिवन प्लेटफॉर्म को और एडवांस करेगी, जो मेटल की खरीद-बिक्री के पुराने तरीकों को बदलने का काम करता है। साथ ही, स्क्रैप (Scrap) को रीसाइकिल करने की अपनी क्षमता को भी बढ़ाने पर ज़ोर देगी। यह निवेश भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सप्लाई चेन की दिक्कतों को दूर करने की NowPurchase की रणनीति पर बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

भारत का मेटल रीसाइक्लिंग बाज़ार दे रहा दस्तक

भारत का मेटल रीसाइक्लिंग मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। उम्मीद है कि 2030 तक यह बाज़ार 21.4 अरब डॉलर का हो जाएगा, जिसमें हर साल औसतन 7.3% की दर से बढ़ोतरी का अनुमान है। कंस्ट्रक्शन (Construction) और ऑटोमोटिव (Automotive) सेक्टर से लगातार बढ़ती मांग, और सरकार की सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) पहलों के कारण यह तेजी देखी जा रही है। NowPurchase का स्क्रैप रीसाइक्लिंग पर फोकस इसी ट्रेंड के साथ तालमेल बिठाता है।

कॉम्पिटिशन में NowPurchase की अलग पहचान

मेटल रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में Gravita India Limited जैसे स्थापित खिलाड़ी मजबूत ग्रोथ दिखा रहे हैं। Gravita India के पास 25.95 के P/E रेश्यो और 22.56% के ROE के साथ मजबूत फाइनेंशियल हैं। वहीं, सरकारी कंपनी MMTC Limited का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा है। NowPurchase अपनी टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करके खुद को अलग करती है। कंपनी का MetalCloud नाम का SaaS प्लेटफॉर्म और WhatsApp बॉट रियल-टाइम (Real-time) अपडेट्स देता है। यह उस मार्केट में पारदर्शिता और एफिशिएंसी (Efficiency) लाने की कोशिश है, जहां अभी भी ज़्यादातर काम अनौपचारिक (Informal) तरीके से होता है। कंपनी की भविष्य में 3-5 साल में IPO लाने की भी योजना है।

आगे की राह और चुनौतियां

हालांकि, NowPurchase के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। भारत का मेटल स्क्रैप सेक्टर काफी हद तक अनऑर्गेनाइज्ड (Unorganized) है, जहां सप्लाई चेन पर अनौपचारिक कलेक्टर्स और रीसाइक्लर्स का बड़ा कंट्रोल है। इन अनौपचारिक नेटवर्क्स के साथ इंटीग्रेट करना या उनसे मुकाबला करना एक बड़ी रुकावट है। बदलते रेगुलेटरी माहौल (Regulatory environment) और EPR कंप्लायंस (Compliance) भी कॉम्प्लेक्सिटी (Complexity) बढ़ाते हैं। Gravita India जैसे कॉम्पिटिटर्स के पास फिजिकल रीसाइक्लिंग का लंबा अनुभव है। NowPurchase की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह फिजिकल प्रोसेसिंग को कितनी अच्छी तरह इंटीग्रेट कर पाती है और मजबूत सप्लायर नेटवर्क्स बना पाती है।

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