Nomura का भारतीय स्टील स्टॉक्स पर भरोसा: Tata Steel, JSW Steel में तेजी के आसार, पर इन वैश्विक खतरों से रहें सावधान!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Nomura का भारतीय स्टील स्टॉक्स पर भरोसा: Tata Steel, JSW Steel में तेजी के आसार, पर इन वैश्विक खतरों से रहें सावधान!
Overview

ब्रोकरेज फर्म Nomura भारतीय स्टील सेक्टर को लेकर काफी उत्साहित है। उन्होंने Tata Steel, JSW Steel, Jindal Steel और Lloyds Metals जैसे शेयरों पर 'Buy' रेटिंग बनाए रखी है। कंपनी का मानना है कि बढ़ती डोमेस्टिक डिमांड और स्थिर इनपुट कॉस्ट (Input Cost) सेक्टर को सहारा देगी। हालांकि, वैश्विक तनाव, सप्लाई चेन (Supply Chain) की दिक्कतें और प्रोटेक्शनिज्म (Protectionism) सेक्टर के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं।

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Nomura ने भारतीय स्टील सेक्टर पर अपना सकारात्मक रुख (Positive Outlook) बरकरार रखा है। डोमेस्टिक डिमांड में लगातार हो रही बढ़ोतरी और प्राइसिंग (Pricing) में स्थिरता को देखते हुए, ब्रोकरेज फर्म ने Tata Steel, JSW Steel, Jindal Steel & Power, और Lloyds Metals & Energy जैसे प्रमुख शेयरों पर 'Buy' रेटिंग बनाए रखी है।

क्यों है Nomura उत्साहित?

Nomura के मुताबिक, भारतीय स्टील कंपनियों के मार्जिन (Margins) में विस्तार देखा जा रहा है। अप्रैल 2026 तक HRC स्पॉट मार्जिन ₹38,380 प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले दो साल के औसत से काफी ऊपर है। चीन की ट्रेड पॉलिसी (Trade Policy) और यूरोप के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे वैश्विक मुद्दों के बावजूद, घरेलू बाजार की मजबूती इन कंपनियों को सहारा दे रही है।

डोमेस्टिक डिमांड की धूम

फाइनेंशियल ईयर 2026 में भारत में स्टील की डोमेस्टिक कंजम्पशन (Domestic Consumption) 7-8% बढ़कर 164 मिलियन टन हो गई है। सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) खर्च, निर्माण, रेलवे और मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) सेक्टर की लगातार सक्रियता इस ग्रोथ को सपोर्ट कर रही है। इसी अवधि में क्रूड स्टील आउटपुट (Crude Steel Output) में 10.7% की सालाना बढ़ोतरी हुई, जो लगभग 168.4 मिलियन टन तक पहुंच गया। Nomura का मानना है कि Tata Steel, JSW Steel, Jindal Steel & Power और Lloyds Metals & Energy अपनी पैमाना (Scale), ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी (Operational Flexibility) और लागत संरचना (Cost Structure) के कारण इस ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में हैं।

वैश्विक चुनौतियाँ और वैल्यूएशन

जहां डोमेस्टिक डिमांड मुख्य इंजन है, वहीं ग्लोबल ट्रेंड्स मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। चीन के स्टील प्राइस में मामूली बढ़ोतरी हुई है, और यूरोपियन प्राइस CBAM के कारण मजबूत बने हुए हैं। लेकिन, बढ़ता वैश्विक प्रोटेक्शनिज्म, जुलाई 2026 से लागू होने वाले EU के सेफगार्ड मेजर्स (Safeguard Measures) और CBAM का विस्तार एक्सपोर्ट के अवसरों को सीमित कर सकते हैं।

वैल्यूएशन (Valuation) की बात करें तो, अप्रैल 2026 तक JSW Steel का पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) लगभग 35.74-50.74 है, Jindal Steel & Power का 32.5-61.18 और Lloyds Metals & Energy का 27.01-33.88 है। ये आंकड़े बताते हैं कि Jindal Steel & Power जैसे कुछ शेयर पीयर्स (Peers) जैसे SAIL (जिसने घाटा दिखाया) और APL Apollo Tubes (पी/ई 47.1-64.9) की तुलना में प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं।

भू-राजनीतिक जोखिम और लागत में वृद्धि

Nomura की उम्मीदों के बावजूद, भारतीय स्टील सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां बनी हुई हैं। खासकर मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ता भू-राजनीतिक संघर्ष एनर्जी मार्केट्स (Energy Markets) को डिस्टर्ब कर रहा है, जिससे LPG और LNG जैसे जरूरी औद्योगिक ईंधनों की सप्लाई शॉर्टेज का खतरा बढ़ गया है। भारत का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण मार्गों से होने वाला इम्पोर्ट (Import) सप्लाई रिस्क को काफी बढ़ा देता है। इससे इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है और ऑपरेशंस में बाधा आ सकती है। 2026 की शुरुआत में हुए संकट ने इस भेद्यता को उजागर किया, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई की राशनिंग हुई। Jindal Steel जैसी कंपनियां अल्टरनेटिव्स (Alternatives) जैसे सिनगैस (Syngas) तलाश रही हैं, लेकिन सेक्टर अभी भी इस जोखिम के प्रति संवेदनशील है। इसके अलावा, ग्लोबल ट्रेड टेंशन और बढ़ते टैरिफ (Tariffs), जिसमें EU का CBAM शामिल है, एक्सपोर्ट ग्रोथ को सीमित कर सकते हैं और प्राइस प्रेशर पैदा कर सकते हैं। Jindal Steel & Power (पी/ई 60 से ऊपर) और JSW Steel (पी/ई लगभग 39.22, जो इसके 10-साल के मीडियन से ऊपर है) जैसे कुछ शेयरों का वैल्यूएशन इन बढ़ते बाहरी जोखिमों को देखते हुए काफी ज्यादा लग रहा है।

आगे का रास्ता: ग्रोथ और वैश्विक अनिश्चितता का संतुलन

भारतीय स्टील इंडस्ट्री से उम्मीद की जा रही है कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और डोमेस्टिक डिमांड के सपोर्ट से ग्रोथ जारी रखेगी। 2030 तक 300 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, सेक्टर की वर्तमान मार्जिन लेवल को बनाए रखने और प्राइस वोलेटिलिटी (Price Volatility) को संभालने की क्षमता, भू-राजनीतिक अस्थिरता से इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव, एनर्जी सप्लाई की सुरक्षा और अधिक प्रोटेक्शनिस्ट ग्लोबल ट्रेड एनवायरनमेंट (Global Trade Environment) को अपनाने पर निर्भर करेगी। यह इंडस्ट्री मजबूत डोमेस्टिक डिमांड को इन जटिल बाहरी कारकों के साथ संतुलित करते हुए अपनी मजबूती का प्रदर्शन करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.