प्रोडक्शन की राह खुली
नोएडा और ग़ाज़ियाबाद जिलों के मज़दूरों को 21% का अंतरिम वेतन भुगतान मिलने के बाद, 15 अप्रैल से फैक्टरियों में फिर से घंटी बजने लगी है। 14 अप्रैल को छुट्टी और विवाद के चलते बंद रहीं फैक्ट्रियां अब सामान्य रूप से काम करेंगी। इसमें Dixon Technologies, Zetwerk, Oppo, और Vivo जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इस घटना ने भारत के बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लेबर अनरेस्ट (श्रमिक अशांति) की संभावनाओं को फिर से उजागर किया है।
मार्जिन पर पड़ेगा दबाव?
1 अप्रैल से लागू हुई नई वेतन दरें मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट (परिचालन लागत) को बढ़ा देंगी। भारत की सबसे बड़ी होमग्रोन EMS प्रोवाइडर Dixon Technologies की P/E रेश्यो 40-48x है और मार्केट कैप करीब ₹64,881 करोड़ है, जो मजबूत ग्रोथ की उम्मीदें दिखाता है। लेकिन, EMS सेक्टर में मार्जिन बहुत पतला होता है, अक्सर 2-3% के आसपास। ऐसे में 21% की बड़ी वेतन बढ़ोतरी सीधे तौर पर इन पतले मार्जिन को और कम कर देगी। यह खासकर इसलिए चिंताजनक है क्योंकि डिक्सन के कारोबार का लगभग 90% हिस्सा एंट्री-लेवल स्मार्टफोन से आता है, और ऊंची कीमतों से मांग प्रभावित हो सकती है।
सेक्टर की बड़ी चुनौतियां
सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और 'चाइना+1' स्ट्रैटेजी से भारत का EMS सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है। लेकिन, अभी भी कई स्ट्रक्चरल दिक्कतें हैं। कंपनियां 85-90% तक इम्पोर्टेड कंपोनेंट्स पर निर्भर हैं, जिससे सप्लाई चेन में दिक्कतें और करेंसी के उतार-चढ़ाव का खतरा बना रहता है। चीन और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में भारत की मैन्युफैक्चरिंग लागत भी ज़्यादा है। यह भी माना जा रहा है कि हरियाणा में इसी तरह की वेतन वृद्धि से नोएडा के मज़दूर प्रेरित हुए थे।
निवेशकों की चिंताएं
बार-बार होने वाली लेबर अनरेस्ट भारत की एक स्थिर निवेश डेस्टिनेशन (निवेश गंतव्य) के तौर पर छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। उद्योग जगत के दिग्गजों का मानना है कि ऐसे मामले निवेशकों के भरोसे को तोड़ सकते हैं। EMS सेक्टर, जो मुख्य रूप से असेंबली पर केंद्रित है, में लिमिटेड प्राइसिंग पावर और पतले मार्जिन होते हैं। सरकारी इंसेंटिव केवल कुछ हद तक ही मदद कर सकते हैं। Dixon Technologies के शेयर में भी पिछले साल करीब 25% की गिरावट आई थी और यह मार्च 2026 में 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया था। लेबर डिस्प्यूट (श्रमिक विवाद) और बढ़ती लागतें कंपनी के लिए मार्जिन ग्रोथ बनाए रखने में बड़ी चुनौती हैं।
भविष्य का रास्ता
एनालिस्ट्स Dixon Technologies के लिए मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। 'Buy' रेटिंग के साथ औसतन 12,617 INR का टारगेट प्राइस है, लेकिन कुछ एनालिस्ट्स सावधानी बरत रहे हैं। जेफरीज ने 'Hold' रेटिंग दी है, जो ग्लोबल स्मार्टफोन डिमांड में कमी और इनपुट लागतों (खासकर मेमोरी चिप्स) को लेकर चिंतित है। दूसरी ओर, नोमुरा कमाई की उम्मीदों को लेकर सकारात्मक है। EMS सेक्टर को लंबी अवधि में मार्जिन सुधार और इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग और कंपोनेंट प्रोडक्शन की ओर बढ़ना होगा। फिलहाल, Dixon Technologies जैसी कंपनियों को बढ़ती लेबर कॉस्ट, अनिश्चित ग्लोबल डिमांड और सप्लाई चेन के जोखिमों से निपटना होगा।