Hyderabad स्थित Nexon Geochem ने भारतीय कच्चे माल का उपयोग करके हाई-परफॉरमेंस परमानेंट मैग्नेट बनाने में सफलता हासिल की है। कंपनी का लक्ष्य **FY33** तक **1,200** टन क्षमता का प्लांट लगाना है, जो EV और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर एक कदम
Nexon Geochem ने रूस की Giredmet तकनीक का उपयोग करके स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल को सफलतापूर्वक वैलिडेट कर लिया है। यह कदम देश में आयातित फीडस्टॉक पर निर्भरता को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी तकनीकी जीत है। वर्तमान में, कंपनी हैदराबाद में अपनी पायलट प्रोडक्शन यूनिट को शुरू करने की तैयारी कर रही है, जो भविष्य के बड़े कमर्शियल प्लांट का आधार बनेगी।
क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
कंपनी 2033 फाइनेंशियल ईयर तक 1,200 टन प्रति वर्ष की क्षमता वाला एक इंटीग्रेटेड प्रोडक्शन हब तैयार करना चाहती है। ये मैग्नेट, जिन्हें Neodymium-Iron-Boron (NdFeB) कहा जाता है, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के ट्रैक्शन मोटर्स और विंड एनर्जी जनरेटर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सरकारी प्रोत्साहन और चुनौतियां
यह पहल सरकार के 'मेक इन इंडिया' विजन के अनुरूप है। भारत सरकार के Ministry of Heavy Industries ने इंटीग्रेटेड मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹7,280 करोड़ का इंसेंटिव स्कीम बजट रखा है, जिसमें Nexon Geochem भी एक प्रमुख भागीदार है।
हालांकि कंपनी अभी प्राइवेट है और शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, लेकिन इस सेक्टर पर नजर रखना जरूरी है। कमर्शियल स्तर पर सफलता हासिल करने के लिए कंपनी को भारी कैपिटल इन्वेस्टमेंट और तकनीकी मानकों को पूरा करने की बड़ी चुनौती का सामना करना होगा। यदि यह प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक स्केल होता है, तो यह भारतीय निर्माताओं के लिए एक बड़ा घरेलू विकल्प साबित होगा, जिससे सप्लाई चेन में तेजी आएगी और विदेशों पर निर्भरता कम होगी।
