Neo Infra Fund II का पहला पड़ाव पार! **₹1,500 करोड़** जुटाए, अब **₹5,000 करोड़** का लक्ष्य

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AuthorMehul Desai|Published at:
Neo Infra Fund II का पहला पड़ाव पार! **₹1,500 करोड़** जुटाए, अब **₹5,000 करोड़** का लक्ष्य
Overview

Neo Alternative Asset Managers Pvt Ltd (NAAM) ने अपने Neo Infra Income Opportunities Fund II का पहला क्लोज **₹1,500 करोड़** पर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस फंड का कुल लक्ष्य **₹5,000 करोड़** जुटाने का है। यह फंड मुख्य रूप से सड़क और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे रेवेन्यू-जेनरेटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर एसेट्स पर फोकस करेगा, जिनमें अक्सर सरकारी संस्थाओं का बैकिंग होती है।

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आय-उत्पन्न करने वाली इन्फ्रास्ट्रक्चर एसेट्स पर फोकस

Neo Infra Income Opportunities Fund II ने अपने शुरुआती क्लोजिंग में ₹1,500 करोड़ की राशि जुटाई है और इसका लक्ष्य ₹5,000 करोड़ तक पहुंचना है। इस फंड की रणनीति लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स वाले ऑपरेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर एसेट्स को एक्वायर करने पर केंद्रित है, जिनसे स्थिर भुगतान (predictable payments) मिलने की उम्मीद है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा सरकारी संस्थाओं से जुड़ा हुआ है।

सड़क और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लगातार आय के स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करके, यह फंड पारंपरिक फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स के लिए एक आकर्षक विकल्प पेश करता है। फंड का एक छोटा हिस्सा निजी तौर पर लिस्टेड इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) में भी लगाया जाएगा, ताकि पोर्टफोलियो में विविधता लाई जा सके और पूंजी का संरक्षण हो सके। यह स्ट्रैटेजी फंड के पिछले संस्करण की सफलता पर आधारित है, जिसने NHAI हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) रोड प्रोजेक्ट्स और सोलर पोर्टफोलियो जैसे एसेट्स में निवेश किया था। Neo Asset Management (NAAM) के पास वर्तमान में पांच फंड्स में लगभग USD 550 मिलियन (लगभग ₹4,500 करोड़) की संपत्ति प्रबंधन (AUM) है।

सरकारी खर्च से बढ़ावा पा रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर बूम

यह फंड जुटाने में मिली सफलता भारत सरकार के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता के अनुरूप है। भारत के पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बजट 2026-27 में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹12.2 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो GDP का 3.1% है और पिछले वर्ष की तुलना में 9% अधिक है। इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड जैसी पहलों का उद्देश्य प्रोजेक्ट्स को डी-रिस्क करना और प्राइवेट निवेश को प्रोत्साहित करना है।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र, विशेष रूप से सोलर, को काफी पॉलिसी सपोर्ट और प्रोत्साहन मिल रहा है। PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana और PM-KUSUM जैसी योजनाएं इसके विस्तार को गति दे रही हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) भी हाईवे निर्माण में तेजी ला रही है, जिसने FY2025-26 में 5313 किमी का निर्माण लक्ष्य पार कर लिया है और अपना कर्ज ₹2 लाख करोड़ से नीचे ला दिया है।

InvITs मार्केट में बढ़ती निवेशक रुचि

इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड का बाजार लगातार बढ़ रहा है, और अन्य खिलाड़ी भी निवेशकों से मजबूत रुचि देख रहे हैं। Neo Asset Management का फ्लैगशिप फंड, NIIOF, पहले भी अपने लक्ष्य से ऊपर ₹2,300 करोड़ पर क्लोज हुआ था। वेयरहाउसिंग InvITs ने भी लोकप्रियता हासिल की है, जिसमें TVS ILP ने अपना InvIT लिस्ट किया और ₹1,300 करोड़ से अधिक जुटाए। भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) मार्केट में FY26 तक AUM के ₹7.25-7.50 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण सड़कें और दूरसंचार क्षेत्र हैं। Nifty REITs और InvITs इंडेक्स ने 2025 में 25.48% का रिटर्न दिया, जो ब्रॉडर मार्केट से बेहतर प्रदर्शन रहा। 5.25% की स्थिर रेपो दर InvITs जैसे यील्ड-ओरिएंटेड एसेट्स का और समर्थन करती है।

सेक्टर के जोखिम और चुनौतियाँ

सकारात्मक बाजार भावना के बावजूद, इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में कुछ अंतर्निहित जोखिम भी हैं। उच्च लीवरेज (Leverage) एक प्रमुख चिंता है, क्योंकि बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भारी कर्ज की आवश्यकता होती है। यह कंपनियों को ब्याज दरों में बदलाव और कैश फ्लो में देरी के प्रति संवेदनशील बनाता है। प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में देरी, जो अक्सर भूमि अधिग्रहण में बाधाओं, नियामक मंजूरी या ठेकेदार विवादों के कारण होती है, लागत में वृद्धि और मार्जिन में कमी का कारण बन सकती है। पॉलिसी और रेगुलेटरी अनिश्चितताएं, साथ ही पर्यावरणीय और भू-राजनीतिक तनाव भी चुनौतियाँ पेश करते हैं। InvITs स्पेस में, सेक्टर कंसंट्रेशन, विशेष रूप से सड़कों और दूरसंचार में, जोखिम पैदा कर सकता है। NAAM एसेट मैनेजमेंट और अंडरराइटिंग अनुशासन पर जोर देता है, लेकिन फंड की सफलता इन एग्जीक्यूशन और बाजार से संबंधित चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने पर निर्भर करेगी। NAAM के सह-संस्थापक और सीईओ, Hemant Daga, के पास Edelweiss Asset Management का व्यापक अनुभव है, जहां उन्होंने अल्टरनेटिव एसेट्स में महत्वपूर्ण वृद्धि की देखरेख की थी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.