नवरत्न सीमेंट इंडस्ट्रीज एलएलपी ने पंजाब के राजपुरा जिले में ₹250 करोड़ के निवेश से एक ग्रीन सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना का ऐलान किया है। यह प्रोजेक्ट भारत के तेजी से बढ़ते ग्रीन सीमेंट मार्केट में कंपनी की एंट्री का संकेत देता है, जिसका लक्ष्य एडवांस्ड, कम-उत्सर्जन वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना है। यह पहल पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री की बढ़ती मांग और सरकारी लक्ष्यों के अनुरूप है।
हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना की राह में कई बड़ी बाधाएं हैं। सबसे पहले, कंपनी को सीमेंट इंडस्ट्री के दिग्गजों जैसे अल्ट्राटेक सीमेंट (UltraTech Cement), श्री सीमेंट (Shree Cement) और डालमिया भारत (Dalmia Bharat) से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। ये कंपनियां बड़े पैमाने पर परिचालन, मजबूत वित्तीय स्थिति और स्थापित सस्टेनेबिलिटी ट्रैक रिकॉर्ड के साथ बाजार में हावी हैं। उदाहरण के लिए, अल्ट्राटेक सीमेंट का मार्केट कैप लगभग ₹3,25,876.52 करोड़ है और इसका P/E रेशियो 51.98 है, साथ ही यह FY24 तक 34% नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग का लक्ष्य रखती है। वहीं, श्री सीमेंट का मार्केट कैप करीब ₹92,741.05 करोड़ और P/E रेशियो 84.06 है, और यह भी उत्सर्जन कटौती के लिए प्रतिबद्ध है। डालमिया भारत 2040 तक कार्बन नेगेटिव बनने का लक्ष्य रखता है।
इसके विपरीत, रिपोर्टों के अनुसार नवरत्न ग्रुप, जिसके विविध परिचालन हैं, जुलाई 2024 तक केवल सात कर्मचारियों के साथ 'अनफंडेड' है। इसके अलावा, 'नवरत्न ग्रीन सीमेंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड' का स्टेटस 'स्ट्राइक ऑफ' पाया गया है। कंपनी के संस्थापक, हिमांशु वर्मा, पर 'रॉयल्टी फ्रॉड' मामले में 'धोखाधड़ी और जालसाजी' के आरोप भी लगे हैं। ऐसे में, इतनी बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजना को इतनी छोटी टीम और संस्थापक से जुड़े कानूनी पेंचों के साथ सफलतापूर्वक लॉन्च करना और प्रतिस्पर्धियों का मुकाबला करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
पंजाब सरकार की 2026 की औद्योगिक नीति राज्य को निवेश हब बनाने पर जोर देती है, और नवरत्न का प्रोजेक्ट इस दिशा में फिट बैठता है। भारत का ग्रीन सीमेंट मार्केट 2030 तक $3.28 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें मिश्रित सीमेंट का उत्पादन पहले से ही 70% से अधिक है। लेकिन, नवरत्न की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिति पर उठ रहे सवालों के बीच, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वे इस पूंजी-गहन और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी उद्योग में टिक पाएंगे।
