### हरित ऊर्जा की अनिवार्यता
नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (नाल्को) अपनी ऊर्जा अवसंरचना में एक महत्वपूर्ण उन्नयन करने जा रही है, जिसका लक्ष्य बैटरी स्टोरेज द्वारा समर्थित 200-300 मेगावाट ग्रीन पावर क्षमता स्थापित करना है। यह पहल नाल्को के पावर-इंटेंसिव स्मेल्टिंग संचालन से उत्पन्न होने वाले कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करने की रणनीति का एक मुख्य हिस्सा है। वर्तमान में, कंपनी पूरी तरह से कोयला-आधारित कैप्टिव पावर प्लांटों पर निर्भर है, जो उसके कुल कार्बन फुटप्रिंट का लगभग 80% उत्पन्न करता है। यह बदलाव टिकाऊ एल्युमिनियम उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो वैश्विक पर्यावरणीय दबावों और विकसित हो रहे बाजार की मांगों के अनुरूप है। नाल्को के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर, बृजेंद्र प्रताप सिंह ने संकेत दिया है कि यह परिवर्तन अगले तीन से चार वर्षों में होने की उम्मीद है, जिसका लक्ष्य मौजूदा खपत में 20-30% नवीकरणीय ऊर्जा को शामिल करना है। हाल के बाजार आंकड़ों के अनुसार, 23 जनवरी 2026 को नाल्को का स्टॉक लगभग ₹370.65 पर कारोबार कर रहा था, जिसका बाजार पूंजीकरण लगभग ₹68,000 करोड़ था। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 25 की पहली छमाही में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया था, जिसमें राजस्व 18-19% और मुनाफे में लगभग 47% की वृद्धि हुई थी।
### लागत और उपलब्धता की चुनौती से निपटना
सीएमडी सिंह के अनुसार, नाल्को और व्यापक भारतीय एल्युमिनियम क्षेत्र के लिए प्राथमिक बाधा ग्रीन पावर की आर्थिक व्यवहार्यता और निरंतर उपलब्धता है। ग्रीन एनर्जी टैरिफ वर्तमान में ₹4.5-5 प्रति यूनिट के बीच चल रहे हैं, जो उसके इन-हाउस कोयला-आधारित बिजली की ₹3-3.5 प्रति यूनिट लागत से काफी अधिक है। स्मेल्टिंग, जो एक मुख्य प्रक्रिया है, उत्पादन लागत का 35-40% हिस्सा है, जिससे बिजली व्यय प्रतिस्पर्धात्मकता का सीधा निर्धारक बन जाता है। इसे कम करने के लिए, नाल्को सक्रिय रूप से दीर्घकालिक पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) की तलाश कर रहा है और अपने स्वयं के नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र विकसित कर रहा है। न्यूनतम लागत पर ग्रीन एनर्जी सुरक्षित करने के लिए रणनीतियाँ बनाने हेतु एक सलाहकार नियुक्त किया गया है, साथ ही चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, जो स्थिर एल्युमिनियम स्मेल्टिंग संचालन के लिए एक गैर-परक्राम्य आवश्यकता है। कंपनी ने अपने मौजूदा हरित पहलों के हिस्से के रूप में 198 मेगावाट पवन ऊर्जा संयंत्रों और 1020 किलोवाट-पीक रूफटॉप सौर प्रतिष्ठानों के साथ पहले ही प्रगति की है। इन प्रयासों के बावजूद, सिंह ने व्यक्त किया है कि भारतीय एल्युमिनियम क्षेत्र अभी तक पूर्ण हरित संक्रमण के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है, जिसमें आपूर्ति की निरंतरता और नवीकरणीय ऊर्जा की उच्च लागत जैसी चुनौतियाँ हैं। यह यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे बाहरी दबावों के बीच हो रहा है, जो कार्बन फुटप्रिंट के आधार पर आयात को लक्षित करता है।
### विविधीकरण और रणनीतिक विस्तार
अपने ऊर्जा परिवर्तन के अलावा, नाल्को एक बहुआयामी विस्तार रणनीति का पालन कर रहा है। प्रमुख परियोजनाओं में इसके एल्युमिना रिफाइनरी में पांचवीं धारा जोड़ना शामिल है, जिसका लक्ष्य क्षमता को 2.1 मिलियन टन से बढ़ाकर 3.1 मिलियन टन करना है। ओडिशा में पोट्टंगी बॉक्साइट खदानों का विकास भी चल रहा है, जिनके खनन पट्टे पहले ही सुरक्षित कर लिए गए हैं। कंपनी ने उत्कल डी और ई ब्लॉकों से कोयला खनन शुरू कर दिया है और अपने स्मेल्टर के ब्राउनफील्ड विस्तार को 0.5 मिलियन टन प्रति वर्ष की दर से कर रहा है। इसके अतिरिक्त, नाल्को महत्वपूर्ण खनिजों में विविधता ला रहा है, दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (REEs), मैग्नीशियम और क्रोमाइट में उद्यमों की खोज कर रहा है, और अपने संयुक्त उद्यम, खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) के माध्यम से एक ऑस्ट्रेलियाई लिथियम खदान में हिस्सेदारी के लिए उचित परिश्रम कर रहा है। वित्तीय रूप से, नाल्को ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया है, जिसका P/E अनुपात 23 जनवरी 2026 तक लगभग 11.1x और ROE लगभग 32.7% था। कंपनी के बोर्ड की त्रैमासिक परिणाम की समीक्षा करने और अंतरिम लाभांश पर विचार करने के लिए 30 जनवरी 2026 को बैठक निर्धारित है। हालिया बाजार भावना में, 23 जनवरी 2026 को चार-दिवसीय तेजी के बाद नाल्को शेयरों में लाभ बुकिंग देखी गई, जो व्यापक क्षेत्र की कमजोरी और कमोडिटी की कीमतों में नरमी को दर्शाता है। पहले, नवंबर 2025 में, स्टॉक में Q2 मुनाफे में 37% YoY वृद्धि की रिपोर्ट और अंतरिम लाभांश की घोषणा के बाद तेजी देखी गई थी।