📈 नंबर्स का लेखा-जोखा
NITCO Limited ने Q3 FY26 के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 56.07% की जबरदस्त बढ़त देखी गई, जो पिछले साल के ₹8,404.98 लाख से बढ़कर ₹13,117.76 लाख हो गया। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू भी 55.70% बढ़कर ₹13,175.62 लाख पर पहुंच गया।
घाटे में आई कमी, 9 महीने में मुनाफा
हालांकि, रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी तिमाही में घाटे में रही। स्टैंडअलोन लॉस बिफोर टैक्स (एक्सेप्शनल आइटम्स के बाद) ₹1,061.47 लाख रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹65,873.40 लाख के बड़े घाटे से काफी बेहतर है। कंसोलिडेटेड लॉस भी ₹66,017.27 लाख से घटकर ₹1,196.24 लाख हो गया।
पिछले नौ महीनों (31 दिसंबर 2025 तक) के आंकड़े ज्यादा राहत देने वाले हैं। स्टैंडअलोन प्रॉफिट आफ्टर एक्सेप्शनल आइटम्स ₹4,057.69 लाख रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी अवधि में ₹73,427.06 लाख के घाटे से बड़ा बदलाव दिखाता है। कंसोलिडेटेड आधार पर, नौ महीने का प्रॉफिट ₹3,643.34 लाख रहा, जो पिछले साल के ₹73,830.19 लाख के घाटे से रिकवरी को दर्शाता है।
असाधारण मदें (Exceptional Items)
इस दौरान, कंपनी ने कुछ 'एक्सेप्शनल आइटम्स' (असाधारण मदों) को भी रिपोर्ट किया है। नए लेबर कोड के कारण ग्रेच्युटी और लीव लायबिलिटी में ₹400.13 लाख का एकमुश्त इजाफा हुआ। साथ ही, अलीबाग फैक्ट्री के PPE की बिक्री पर ₹1,650.00 लाख का इम्पेयरमेंट रिवर्सल भी दर्ज किया गया। मैनेजमेंट ने ₹855.22 लाख के कैपिटल एडवांस इम्पेयरमेंट के लिए प्रोविजन न करने का फैसला किया है, क्योंकि पूरी रिकवरी की उम्मीद है।
सबसे बड़ा खतरा: ₹17,000 लाख का जुर्माना
लेकिन, इन सकारात्मक ऑपरेटिंग परफॉरमेंस के बीच, एक बहुत बड़ी चिंता सामने आई है। ऑडिटर्स ने एक महत्वपूर्ण ₹17,000 लाख (यानी ₹170 करोड़) के भारी जुर्माने का जिक्र किया है, जो एडिशनल डायरेक्टर जनरल फॉरेन ट्रेड (ADGFT) द्वारा लगाया गया है और जिसे अपीलेट बेंच ने भी कन्फर्म किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी की किताबों में इस जुर्माने के लिए कोई प्रोविजन नहीं किया गया है। मैनेजमेंट का कहना है कि उन्होंने लीगल ओपिनियन ली है, जिसके अनुसार यह ऑर्डर 'कानून के विरुद्ध' (bad in law) है।
यह एक बड़ी 'कंटिंजेंट लायबिलिटी' (संभावित देनदारी) है जो कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती है। इसके अलावा, ऑडिटर्स ने यह भी नोट किया है कि कुछ बैंक बैलेंस और करंट एसेट्स/लायबिलिटीज कन्फर्मेशन के अधीन हैं, जो बैलेंस शीट में अनिश्चितता के संकेत देते हैं।
जोखिम और आगे की राह
NITCO के लिए सबसे बड़ा और तात्कालिक जोखिम ₹17,000 लाख का यह अनप्रोवाइडेड जुर्माना है। भले ही मैनेजमेंट अपनी कानूनी लड़ाई को लेकर आश्वस्त हो, लेकिन अगर फैसला कंपनी के खिलाफ आता है, तो यह उसके वित्तीय ढांचे को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। तिमाही में नेट लॉस जारी रहना (Q3 FY26 में) यह भी दर्शाता है कि परिचालन संबंधी चुनौतियां अभी भी हैं, जिन पर गहराई से गौर करने की आवश्यकता है। मैनेजमेंट की ओर से किसी भी फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस की कमी निवेशकों को कंपनी के भविष्य की संभावनाओं और रणनीतिक दिशा के बारे में सीमित जानकारी देती है।
साथ ही, ग्रुप एंटिटीज को ₹100 करोड़ तक के लोन, गारंटी या सिक्योरिटी प्राप्त करने की मंजूरी भी निवेशकों के लिए जांच का विषय होनी चाहिए।
निवेशकों को क्या देखना है?
निवेशकों को ADGFT जुर्माने से जुड़े किसी भी डेवलपमेंट पर और कंपनी की रेवेन्यू की गति बनाए रखने तथा लाभप्रदता की ओर बढ़ने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। श्री विवेक प्रणनाथ तलवार का एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पुनः नियुक्ति नेतृत्व की निरंतरता पर फोकस को दर्शाता है।