नतीजों पर एक नज़र
सरकारी कंपनी NHPC ने मार्च तिमाही (Q4 FY26) के लिए अपने फाइनेंशियल नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के ₹919.63 करोड़ की तुलना में 68% बढ़कर ₹1,549.42 करोड़ रहा। इस प्रॉफिट ग्रोथ को कुल आय में आई ₹3,120.52 करोड़ की बढ़ोतरी से भी बल मिला, जो पिछले साल ₹2,557.71 करोड़ थी। पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) की बात करें तो, नेट प्रॉफिट ₹3,411.73 करोड़ से बढ़कर ₹4,220.46 करोड़ हो गया, जबकि कुल आय ₹11,614.61 करोड़ से बढ़कर ₹12,686.09 करोड़ हो गई।
रिकॉर्ड कैपेसिटी एडिशन
ऑपरेशनल मोर्चे पर, FY26 NHPC के लिए कैपेसिटी एडिशन (क्षमता वृद्धि) के लिहाज़ से अब तक का सबसे बेहतरीन साल रहा। कंपनी ने तीन प्रोजेक्ट्स में कुल 1850 MW क्षमता को चालू (commissioned) किया, जिसमें सुबनसिरी लोअर प्रोजेक्ट (Subansiri Lower Project) भी शामिल है।
शेयर में गिरावट, वजहें -
इतने शानदार आंकड़ों के बावजूद, NHPC का शेयर 15 मई 2026 को ₹76.79 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था, जो इसके 52-हफ्ते के हाई ₹92.34 से काफी नीचे है। नतीजों के ऐलान से पहले ही शेयर अपने पीक से करीब 24% गिर चुका था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली, सुबनसिरी लोअर प्रोजेक्ट में देरी, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) पावर सेक्टर में व्यापक गिरावट और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।
वैल्यूएशन पर सवाल
15 मई 2026 तक, NHPC का मार्केट कैप करीब ₹77,136 करोड़ था। कंपनी का Trailing Twelve Months (TTM) प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 24.40 से 39.53 के बीच बताया जा रहा है। यह वैल्यूएशन उसके बड़े PSU साथियों जैसे NTPC (जिसका P/E रेश्यो लगभग 16-24 है) और Power Grid Corporation of India (जिसका P/E रेश्यो करीब 17-19 है) की तुलना में काफी ज्यादा है। वहीं, Adani Power और Tata Power जैसे डाइवर्सिफाइड एनर्जी सेगमेंट में काम करने वाली कंपनियों का P/E रेश्यो 30-35 के आसपास है।
विश्लेषकों की राय
इसके बावजूद, विश्लेषकों (Analysts) का नज़रिया आम तौर पर NHPC के लिए सकारात्मक है, जिसमें 'Buy' रेटिंग का कंसेंसस है। 12 महीने के लिए औसत प्राइस टारगेट ₹88-90 के आसपास है, जो मौजूदा स्तरों से संभावित तेजी का संकेत देता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी की ग्रोथ उसकी प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन क्षमता, रेगुलेटरी स्थिरता और बदलते एनर्जी सेक्टर में कैपिटल एक्सपेंडिचर मैनेजमेंट पर निर्भर करेगी।