टेंडर में क्या-क्या शामिल है?
NHPC Ltd. ने 5 फरवरी 2026 को यह बड़ा टेंडर डोमेस्टिक कॉम्पिटिटिव बिडिंग के तहत जारी किया है। इसके तहत जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में चिनाब नदी पर बन रहे 1,856 मेगावाट (MW) क्षमता वाले Sawalkot हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए लॉट-1 पैकेज के तहत प्रमुख सिविल और हाइड्रो-मैकेनिकल कामों को पूरा किया जाएगा। इसमें डाइवर्जन टनल (Diversion Tunnels), कोफर डैम (Coffer Dams), एक्सेस टनल (Access Tunnels), संबंधित सड़कें और पानी के नियंत्रण के लिए ज़रूरी हाइड्रो-मैकेनिकल इंस्टॉलेशन जैसे जटिल निर्माण कार्य शामिल हैं। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय-सीमा 108 महीने यानी नौ साल रखी गई है।
बिडिंग की कड़ी शर्तें
जो कंपनियां इस टेंडर में बोली लगाना चाहती हैं, उन्हें बड़े बांधों के निर्माण, लंबी सुरंगों की खुदाई और भारी हाइड्रो-मैकेनिकल गेट्स की स्थापना में बड़ा अनुभव होना ज़रूरी है। इतना ही नहीं, बिडर्स के पास मजबूत वित्तीय स्थिति का होना भी आवश्यक है। पिछले दो सालों में कंपनी का औसत सालाना टर्नओवर (Average Annual Turnover) कम से कम ₹604 करोड़ रहा हो और वर्किंग कैपिटल (Working Capital) ₹95 करोड़ से कम न हो। बिडिंग प्रक्रिया में दो-चरणीय मूल्यांकन (तकनीकी और वित्तीय) होगा, जिसके बाद एक इलेक्ट्रॉनिक रिवर्स ऑक्शन (E-Reverse Auction) होगा। ऑनलाइन बोली जमा करने की अंतिम तिथि 20 मार्च 2026 है, जबकि टेक्नो-कमर्शियल बोलियां 24 मार्च को खोली जाएंगी।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण
Sawalkot प्रोजेक्ट भारत की हिमालयी क्षेत्र में जलविद्युत क्षमता का उपयोग करने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने जोर देकर कहा कि स्टोरेज-आधारित जलविद्युत (Storage-based Hydropower) लगातार बढ़ती सौर और पवन ऊर्जा को संतुलित करने के लिए तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है। Sawalkot जैसे प्रोजेक्ट ग्रिड की स्थिरता सुनिश्चित करने और चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस विकास से क्षेत्र में महत्वपूर्ण रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।