NHPC Limited, भारत की जानी-मानी हाइड्रो पावर कंपनी, ने जम्मू-कश्मीर में दो महत्वपूर्ण हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दिखाकर अपनी क्षमता विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने Uri-I स्टेज-II (240 MW) और Dulhasti स्टेज-II (260 MW) हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स के लिए ₹5,702.91 करोड़ के इन्वेस्टमेंट प्रपोजल्स को अंतिम मंजूरी दे दी है।
अगर इन प्रोजेक्ट्स की लागत पर गौर करें, तो Uri-I स्टेज-II प्रोजेक्ट के लिए ₹2,708.95 करोड़ का अनुमानित खर्च आएगा। इसमें कंस्ट्रक्शन के दौरान लगने वाले ब्याज (Interest During Construction - IDC) और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) का खर्च भी शामिल है।
इसी तरह, Dulhasti स्टेज-II प्रोजेक्ट के लिए लगभग ₹2,993.96 करोड़ की लागत आएगी, जिसमें IDC और इंफ्रास्ट्रक्चर के खर्चे शामिल हैं। ये आंकड़े NHPC के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के प्रति मजबूत इरादों को साफ दिखाते हैं।
यह कदम NHPC की हाइड्रोइलेक्ट्रिक जनरेशन कैपेसिटी (Hydroelectric Generation Capacity) को बढ़ाने की स्ट्रैटेजिक (Strategic) सोच को दर्शाता है। हाइड्रो पावर, देश की रिन्यूएबल एनर्जी का एक अहम स्तंभ है, जो ग्रिड स्टेबिलिटी (Grid Stability) बनाए रखने और पीक डिमांड (Peak Demand) को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इन प्रोजेक्ट्स में निवेश करके, NHPC न केवल अपनी ऑपरेशनल कैपेसिटी (Operational Capacity) को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) और क्लीन एनर्जी टारगेट्स (Clean Energy Targets) को पूरा करने में भी एक बड़ा योगदान देगा।
NHPC पहले से ही जम्मू-कश्मीर में Uri-I और Dulhasti जैसे सफल प्रोजेक्ट्स का संचालन कर रहा है। स्टेज-II प्रोजेक्ट्स का विकास मौजूदा विशेषज्ञता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित होगा, जिससे इन प्रोजेक्ट्स के तेजी से और कुशलता से पूरा होने की उम्मीद है। ये प्रोजेक्ट्स तैयार होने पर नेशनल ग्रिड में कुल 500 MW की क्लीन एनर्जी जोड़ेंगे।
हालांकि, यह मंजूरी NHPC द्वारा जम्मू-कश्मीर सरकार और/या JKSPDC के साथ इम्प्लीमेंटेशन एग्रीमेंट्स (Implementation Agreements) पर हस्ताक्षर करने और सभी जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल्स (Regulatory Approvals) प्राप्त करने के अधीन है। इन प्रोसीजरल स्टेप्स (Procedural Steps) में किसी भी तरह की देरी या निर्माण के दौरान अप्रत्याशित भूवैज्ञानिक चुनौतियों (Geological Challenges) के कारण प्रोजेक्ट की समय-सीमा और लागत पर असर पड़ सकता है। इसलिए, इन्वेस्टर्स (Investors) अगले 1-2 क्वार्टर्स में इन समझौतों की प्रगति और निर्माण शुरू होने पर बारीकी से नज़र रखेंगे।