NHAI ने हाईवे प्रोजेक्ट्स की मंजूरी के लिए नए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब डेवलपर्स को प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए **80%** प्लांटेशन और **90%** पौधों के जीवित रहने का प्रमाण देना होगा।
अब पर्यावरण पर भी टिकी है प्रोजेक्ट की सफलता
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अब प्लांटेशन और लैंडस्केपिंग को हाईवे निर्माण का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है। नए दिशानिर्देशों के तहत, डेवलपर्स को प्रोविजनल सर्टिफिकेट ऑफ कंप्लीशन (PCC) या कमर्शियल ऑपरेशन की तारीख (PCOD) पाने के लिए उपलब्ध राइट ऑफ वे (ROW) पर कम से कम 80% हरियाली सुनिश्चित करनी होगी।
भुगतान पर रोक का खतरा
यह बदलाव कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए बड़ा है। यदि कोई डेवलपर 80% का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाता है, तो उसे 'पंच लिस्ट' में डाल दिया जाएगा। इसका सीधा असर पेमेंट्स पर पड़ेगा, क्योंकि जब तक हरियाली का लक्ष्य पूरा नहीं होगा, एजेंसी कॉन्ट्रैक्टर्स का पैसा होल्ड (Hold) कर सकती है। यह नियम EPC, HAM और BOT जैसे सभी प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट मॉडल्स पर लागू होगा।
मेंटेनेंस की बढ़ेगी लागत
NHAI ने ऑपरेशंस और मेंटेनेंस (O&M) फेज के लिए भी कड़े नियम तय किए हैं। कंपनियों को यह गारंटी देनी होगी कि लगाए गए पौधों में से कम से कम 90% जीवित रहें। यदि पौधे सूखते हैं, तो उनकी जगह नए पौधे लगाना डेवलपर्स की जिम्मेदारी होगी। निवेशकों के लिए यह एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ साबित हो सकता है, क्योंकि लंबे समय तक पौधों की देखभाल और रिप्लेसमेंट का खर्च कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।
निवेशकों के लिए जोखिम
फाइनेंशियल नजरिए से, मुख्य जोखिम प्रोजेक्ट सर्टिफिकेशन में देरी का है। अगर सड़क तैयार भी हो जाए, लेकिन प्लांटेशन ऑडिट में फेल हो गई, तो एन्युटी (Annuity) या टोल कलेक्शन शुरू होने में देरी हो सकती है, जिससे शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी पर असर पड़ सकता है। अब बाजार की नजर इस पर रहेगी कि कंपनियां इन सख्त पर्यावरण मानकों के साथ अपने निर्माण कार्य को कैसे मैनेज करती हैं।
