NHAI ने गुजरात में सड़क निर्माण की अड़चनों को दूर करने के लिए Sardar Sarovar Narmada Nigam के साथ हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मकसद इरिगेशन इंफ्रास्ट्रक्चर और हाईवे प्रोजेक्ट्स के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर प्रोजेक्ट्स में देरी को कम करना है। साथ ही, NHAI ने साल **2047** तक **50,000 किलोमीटर** एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर बनाने के लक्ष्य के साथ सख्त डिजाइन मानक भी लागू किए हैं।
सरकार ने गुजरात में सड़क परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और Sardar Sarovar Narmada Nigam के बीच हुए इस समझौते से निर्माण कार्य में आ रही बाधाएं दूर होंगी। पहले हाईवे प्लानर्स और सिंचाई विभाग में समन्वय न होने के कारण काम अटक जाता था, लेकिन अब एक टाइम-बाउंड अप्रूवल प्रोसेस लागू किया गया है। कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए यह खबर अच्छी है क्योंकि इससे प्रोजेक्ट्स के मार्जिन में सुधार होने की उम्मीद है।
स्टैंडर्डाइजेशन पर जोर
NHAI ने अब सभी नए 4-लेन और 6-लेन प्रोजेक्ट्स के लिए अनिवार्य डिजाइन दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब तक अलग-अलग स्पेसिफिकेशन्स के कारण प्लानिंग में बदलाव करने पड़ते थे, जिससे खर्च बढ़ता था। नए नियमों के तहत, अब ट्रैफिक डिमांड के डेटा के आधार पर सड़कों का लेआउट तय होगा, जिससे अनावश्यक निवेश पर लगाम लगेगी।
सुरक्षा और बेहतर लॉजिस्टिक्स
नई गाइडलाइंस में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। हाई-स्पीड सड़कों पर अब सरफेस लेवल इंटरसेक्शन और मीडियन कट्स पर पाबंदी होगी। साथ ही, एग्जिट्स के लिए 5 किमी, 2 किमी, 1 किमी और 500 मीटर के अंतराल पर साइनबोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। यह बदलाव 'विकसित भारत 2047' रोडमैप का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में लॉजिस्टिक्स लागत को घटाना और व्यापार की गति को तेज करना है। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे अन्य राज्यों में भी इस तरह का समन्वय लागू किया जाता है।
