NHAI ने निर्माण कंपनी PNC Infratech को अगले **3 साल** के लिए नए प्रोजेक्ट्स में बोली लगाने से प्रतिबंधित कर दिया है। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में भारी खामियों के चलते यह फैसला लिया गया है, जिससे कंपनी के शेयर में **20%** की बड़ी गिरावट देखी गई है।
बड़ा झटका और सरकारी आदेश
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने PNC Infratech के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। कंपनी को किसी भी नए टेंडर में भाग लेने से 3 साल के लिए रोक दिया गया है। यह कार्रवाई कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे में निर्माण संबंधी गंभीर खामियों के कारण की गई है।
IIT खड़गपुर की रिपोर्ट और नुकसान
IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों द्वारा की गई जांच में यह पाया गया कि एक्सप्रेसवे के प्रभावित हिस्सों में निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिसके लिए केवल मरम्मत पर्याप्त नहीं है। इन हिस्सों का पूरी तरह से पुनर्निर्माण (Reconstruction) करना आवश्यक है।
इस फैसले के साथ ही NHAI ने एक्सप्रेसवे पर टोल कलेक्शन को भी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इससे कंपनी को प्रतिदिन ₹42 लाख के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
निवेशकों की चिंता और लीगल एक्शन
कंपनी ने 11 सितंबर को जारी इस डिबार्मेंट ऑर्डर को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात कही है। यह प्रोजेक्ट कंपनी द्वारा 'हाइब्रिड एन्युटी मॉडल' (HAM) के तहत चलाया जा रहा था। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सख्त रुख के बाद सरकार ने निर्माण में लापरवाही बरतने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिसका सीधा असर अब कंपनी के आने वाले ऑर्डर बुक और नए प्रोजेक्ट्स पर पड़ता दिख रहा है।
