Asian Granito India Share: NCLT से मिली मंजूरी, पर ₹104 Cr के टैक्स विवाद का क्या होगा?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Asian Granito India Share: NCLT से मिली मंजूरी, पर ₹104 Cr के टैक्स विवाद का क्या होगा?
Overview

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), अहमदाबाद बेंच ने Asian Granito India Limited (AGIL) की सहायक कंपनियों से जुड़े कॉर्पोरेट डीमर्जर स्कीम को मंजूरी दे दी है। यह अहम फैसला AGIL को अपने ऑपरेशंस को इंटीग्रेट करने और मार्केट तक पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा। NCLT ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की **₹104.73 करोड़** की विवादित टैक्स देनदारी पर आपत्ति के बावजूद इस स्कीम को मंजूरी दी है।

NCLT, अहमदाबाद बेंच ने Asian Granito India Limited (AGIL) के लिए 'कम्पोजिट स्कीम ऑफ अरेंजमेंट' को हरी झंडी दे दी है। इस मंजूरी से AGIL की सहायक कंपनी Adicon Ceramica Tiles Pvt. Ltd. का टाइल्स मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस दूसरी कंपनी Adicon Ceramics Limited में मर्ज हो जाएगा। यह कदम AGIL के लिए मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को इंटीग्रेट करने, प्रोडक्शन लाइन्स का विस्तार करने और मार्केट तक अपनी पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इस मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने NCLT में इस स्कीम का विरोध किया। डिपार्टमेंट ने AGIL पर ₹104.73 करोड़ की इनकम टैक्स देनदारी का मुद्दा उठाया और कहा कि यह प्रस्तावित स्कीम टैक्स-न्यूट्रल नहीं है, साथ ही यह इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की कुछ धाराओं का पालन नहीं करती। डिपार्टमेंट का तर्क था कि डीमर्जर से टैक्स बेनिफिट नहीं मिलना चाहिए।

हालांकि, NCLT ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि इनकम टैक्स एक्ट के प्रोविजन्स सिर्फ उसी कानून के लिए हैं और ये कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग स्कीम को मंजूरी देने में बाधा नहीं बन सकते। NCLT ने यह भी स्पष्ट किया कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट कंपनी की किसी भी टैक्स देनदारी को लेकर अपनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

AGIL का कहना है कि इस डीमर्जर का मुख्य मकसद स्टेकहोल्डर्स के लिए जोखिम को कम करना, एक मजबूत और टिकाऊ बिजनेस खड़ा करना है। इस इंटीग्रेशन से ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ेगी और एक बड़े मार्केटिंग नेटवर्क का फायदा मिलेगा।

भले ही NCLT से रीस्ट्रक्चरिंग के लिए बड़ी बाधा दूर हो गई हो, लेकिन ₹104.73 करोड़ की यह टैक्स देनदारी AGIL के लिए एक बड़ा फाइनेंशियल रिस्क बनी हुई है। NCLT ने स्कीम को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है, लेकिन कंपनी को इस विवादित टैक्स राशि का समाधान निकालना होगा। निवेशकों को कंपनी के साथ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के इस मामले के समाधान पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसका असर कंपनी की वित्तीय सेहत और भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ सकता है।

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