गाइडेंस वापस और प्रोजेक्ट्स में दिक्कतें
NCC Ltd. ने वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 36.6% की गिरावट के साथ ₹122.46 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। कंपनी का रेवेन्यू भी 8.9% घटकर ₹4,868.29 करोड़ रहा। इन नतीजों के चलते, कंपनी के मैनेजमेंट ने आने वाले समय के लिए कोई खास गाइडेंस देने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में कई तरह की दिक्कतें आ रही हैं, जिनमें लंबा मॉनसून, सरकारी अप्रूवल में देरी और भुगतान साइकिल का लंबा खिंचना शामिल है। कंपनी इस साल के लिए अपने रेवेन्यू और मार्जिन के अनुमानों को पहले ही वापस ले चुकी है। मैनेजमेंट का फोकस अब भी मार्जिन को 7% से ऊपर बनाए रखने पर है, जो मौजूदा हालातों में एक बड़ी चुनौती है।
ऑर्डर बुक की मजबूती पर मार्जिन का दबाव
इन चुनौतियों के बावजूद, NCC की नए ऑर्डर्स हासिल करने की क्षमता दमदार बनी हुई है। कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026 के लिए ₹22,000 से ₹25,000 करोड़ के ऑर्डर इनफ्लो का लक्ष्य बरकरार रखा है। जनवरी 2026 की शुरुआत तक, कंपनी को साल-दर-तारीख (year-to-date) ₹22,311 करोड़ के नए ऑर्डर मिल चुके थे। सिर्फ तीसरी तिमाही में ही ₹12,430 करोड़ के नए ऑर्डर आए, जिससे कंपनी की कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक ₹79,571 करोड़ तक पहुंच गई है। जनवरी 2026 में ही ₹2,456.89 करोड़ के अतिरिक्त ऑर्डर मिले, खासकर वॉटर डिविजन से।
लेकिन, इस मजबूत ऑर्डर बुक का असर बॉटम लाइन पर कम दिख रहा है। जहां EBITDA मार्जिन 8.96% तक सुधरकर 8.27% (YoY) हो गया, वहीं PAT मार्जिन घटकर 2.78% रह गया, जो पहले 3.85% था। इसकी बड़ी वजह 18.56% बढ़ा हुआ इंटरेस्ट एक्सपेंस (interest expense) और स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 57.57% की भारी गिरावट है। इससे साफ है कि कंपनी को ऑर्डर्स को मुनाफे में बदलना मुश्किल हो रहा है।
वैल्यूएशन और सेक्टर की चाल
NCC Ltd. फिलहाल अपने कॉम्पिटीटर्स की तुलना में काफी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रही है। इसका TTM P/E रेश्यो लगभग 11.3x से 12.8x के बीच है, जबकि सेक्टर का औसत P/E 37x के आसपास है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) लगभग 9.31% है, जो Rites (18.02%) और Engineers India (17.00%) जैसे दिग्गजों से काफी कम है। कंपनी पर कर्ज का बोझ कम (Debt-to-Equity ratio ~0.29%) है, जो एक अच्छी बात है, पर इसका फायदा अभी तक रिटर्न में नहीं दिख रहा।
सेक्टर में तेजी और एनालिस्ट्स का भरोसा
वहीं, भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर जोरदार ग्रोथ के लिए तैयार है। 2025 में इसके 11.2% की दर से बढ़ने का अनुमान है। सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर इस सेक्टर के लिए बड़ा बूस्टर साबित हो रहा है। बजट 2026-27 में भी इंफ्रा पर ₹12.2 लाख करोड़ का आउटले रखा गया है।
NCC की मौजूदा दिक्कतों के बावजूद, एनालिस्ट्स (analysts) इस स्टॉक को लेकर पॉजिटिव हैं। ज्यादातर एनालिस्ट्स की 'Buy' रेटिंग है और वे शेयर का औसत टारगेट प्राइस ₹412.83 बता रहे हैं, जो मौजूदा कीमत से 170% से ज्यादा की तेजी का संकेत देता है। वहीं, मीडियन टारगेट प्राइस ₹260 है। यह मैनेजमेंट की नरमी और एनालिस्ट्स की उम्मीदों के बीच बड़ा अंतर दिखाता है।
भविष्य की रणनीति
NCC लिमिटेड, NCC Infrastructure Holdings Limited (NCCIHL) का अपने आप में विलय (amalgamation) करने की प्रक्रिया में है, जो 28 फरवरी, 2026 से प्रभावी होगी। इससे कंपनी की संरचना सरल होगी और एफिशिएंसी बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, कंपनी के सामने एग्जीक्यूशन की चुनौतियों से पार पाना और ऑर्डर बुक को मुनाफे में बदलना सबसे बड़ा काम होगा। निवेशक अब आने वाली तिमाहियों में कंपनी के परफॉरमेंस में स्थिरता और सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।